(फाइल फोटो के साथ)
चंडीगढ़, सात सितंबर (भाषा) कांग्रेस नेताओं ने सोमवार को कहा कि पंजाब में अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले सचिन पायलट को राज्य का प्रभारी महासचिव नियुक्त किए जाने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नये जोश और ऊर्जा का संचार होगा तथा गुटबाजी से जूझ रही प्रदेश इकाई को एकजुट करने में भी मदद मिलेगी।
नेताओं ने कहा कि चूंकि, पायलट कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति से पार्टी के चुनाव अभियान को नयी गति मिलेगी।
कांग्रेस ने शनिवार को संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए पायलट को पंजाब का प्रभारी महासचिव नियुक्त किया। पार्टी ने उन्हें भूपेश बघेल की जगह यह जिम्मेदारी सौंपी।
पायलट इससे पहले छत्तीसगढ़ के प्रभारी महासचिव थे। बघेल छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रमुख नेता होने के साथ-साथ राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। वह अब जितेंद्र सिंह की जगह असम का प्रभार संभालेंगे।
पायलट के सामने एक तत्काल चुनौती कांग्रेस की पंजाब इकाई में सब कुछ ठीक करने की होगी, जो पिछले कई हफ्तों से गुटबाजी और अंदरूनी कलह से जूझ रही है।
पंजाब कांग्रेस में मतभेद तब शुरू हुए थे, जब पार्टी आलाकमान ने एक जुलाई को अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश इकाई के अध्यक्ष के रूप में बरकरार रखने के फैसले की घोषणा की थी, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
चन्नी के नेतृत्व में पार्टी नेताओं के एक गुट ने वडिंग को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए रखने पर आपत्ति जताई और उन्हें पद से हटाने की मांग की। उन्होंने चन्नी को पंजाब में कांग्रेस का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करने की भी मांग की।
बघेल के हालिया पंजाब दौरे प्रदेश इकाई में गुटबाजी खत्म करने में नाकाम रहे। यही नहीं, चन्नी समर्थकों ने उन पर वडिंग का “पक्ष लेने” का आरोप भी लगाया।
पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राज कुमार वेरका ने पायलट को राज्य का प्रभारी महासचिव बनाए जाने के पार्टी आलाकमान के फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अब सभी नेता एकजुट हो जाएंगे।
वेरका ने कहा, “पायलट पंजाब के सभी नेताओं को जानते हैं। पंजाब के नेताओं को भी पायलट पर भरोसा है।”
उन्होंने कहा कि पायलट की नियुक्ति से पार्टी की राज्य इकाई एक मंच पर आ जाएगी और “सभी (नेता) एकजुट हो जाएंगे।”
पंजाब कांग्रेस के एक अन्य नेता ने पायलट की नियुक्ति को राज्य में नेतृत्व से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की दिशा में पार्टी आलाकमान की ओर से उठाया गया एक बड़ा कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि इससे अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश और ऊर्जा भरने में भी मदद मिलेगी।
वडिंग ने कहा कि पायलट की ऊर्जा और जोश विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को “निश्चित रूप से” मजबूती प्रदान करेगा। वहीं, गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पायलट का अनुभव, नेतृत्व और लोगों से जुड़ाव पंजाब में कांग्रेस को नयी ताकत और रफ्तार देगा।
यह पहली बार नहीं है, जब पंजाब कांग्रेस गुटबाजी का सामना कर रही है। 2021 में विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले पार्टी नेता नवजोत सिंह सिद्धू के साथ लंबे समय से जारी खींचतान के बीच कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से अचानक हटा दिया था।
बाद में चन्नी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में चन्नी चमकौर साहिब और भदौर, दोनों विधानसभा क्षेत्रों से हार गए। यही नहीं, कांग्रेस का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा। 2017 के विधानसभा चुनाव में मिली 77 सीट के मुकाबले 2022 में पार्टी महज 18 सीट हासिल कर पाई।
राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस प्रदेश इकाई के भीतर जारी कलह को खत्म कर एकजुट होकर मैदान में उतरती है, तो वह राज्य विधानसभा चुनावों में एक मजबूत दावेदार के तौर पर उभर सकती है।
साल 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन से कुछ उम्मीद जगी है। कांग्रेस ने पंजाब की 13 लोकसभा सीट में से सात सीट जीती थीं और कुल 26.39 फीसदी वोट हासिल किए थे, जबकि सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) केवल तीन सीट पर विजयी रही थी।
चंडीगढ़ स्थित पंजाब विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञानी प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने कहा कि पायलट को पंजाब का प्रभारी महासचिव बनाना एक “सही फैसला” है।
उन्होंने कहा, “पायलट को कांग्रेस आलाकमान का भरोसा हासिल है। वह चुनाव प्रचार में भी पार्टी के लिए फायदेमंद साबित होंगे।”
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पंजाब में चुनाव जीतना पायलट के सियासी सफर के लिए भी अहम है, क्योंकि राज्य में सफल चुनाव अभियान से 2028 के राजस्थान विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर उनकी स्थिति को मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है।
भाषा पारुल नरेश
नरेश