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नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को कहा कि स्कूली शिक्षा ही शिक्षा प्रणाली की नींव होती है, क्योंकि ज्ञान और कौशल कभी भी हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बचपन अच्छे आचरण की सीख देने का सबसे अच्छा समय होता है।
राष्ट्रपति ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआती कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर पूरी लगन से ध्यान देकर हमारे शिक्षक आने वाली पीढ़ियों को उत्कृष्ट विद्यार्थी और जिम्मेदार नागरिक बनाने में सक्षम हैं।’’
मुर्मू ने कहा, ‘‘स्कूली शिक्षा पूरी शिक्षा प्रणाली का आधार है। ज्ञान और कौशल किसी भी समय प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन बचपन में अच्छे आचरण की शिक्षा देना अधिक प्रभावी साबित होता है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा हमारे संविधान में निहित समान अवसर के आदर्श को साकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या लगभग नगण्य करने में शिक्षकों की भूमिका की सराहना की।
मुर्मू ने कहा कि कई विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं और उनमें से कुछ अपने परिवार में पहली बार पढ़ाई करने वाले होते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ छात्र छोटे गांवों के स्कूलों से बड़े शहरों के शिक्षण संस्थानों में आते हैं, जबकि कुछ बच्चे अत्यंत प्रतिभाशाली होते हैं, लेकिन उनमें आत्मविश्वास की कमी हो सकती है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ऐसे सभी छात्रों में आत्मविश्वास पैदा करना और उन बच्चों को आगे बढ़ाना, जो किसी भी कारण से खुद को कमजोर महसूस करते हैं, शिक्षकों की विशेष जिम्मेदारी है। हमारे शिक्षक शिक्षा प्रणाली में जीवन का संचार करते हैं। हमें यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना चाहिए कि देश का एक भी विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसरों से वंचित न रहे।’’
मुर्मू ने कहा कि शिक्षकों को अपने स्नेह और समर्पण के माध्यम से सभी विद्यार्थियों में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का विकास करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शैक्षणिक उत्कृष्टता, कौशल विकास और उद्यमिता देश के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘भारत को दुनिया की कौशल राजधानी बनाना और उसे ज्ञान आधारित महाशक्ति में बदलना हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। हम विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं और यह लक्ष्य केवल विश्वस्तरीय शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।’’
शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने शनिवार को तीन विभागों से चुने गए 82 शिक्षकों और शिक्षाविदों को सम्मानित किया। इनमें स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के 48 शिक्षक, उच्च शिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक के 21 शिक्षक या फैकल्टी सदस्य, और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के 13 कौशल प्रशिक्षक शामिल हैं।
भाषा
शफीक सुरेश
सुरेश