कोलकाता, पांच सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार उच्चतम न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार पारदर्शी तरीके से शिक्षकों की भर्ती करेगी।
उन्होंने कहा कि मौखिक परीक्षा का महत्व (वेटेज) पांच अंकों से अधिक नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “चयन के लिए मेधा मुख्य आधार होगी। हम उच्चतम न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार शिक्षकों की भर्ती करेंगे। चिंता करने की कोई बात नहीं है। मैंने अधिकारियों से कहा है कि वे यह सुनिश्चित करें कि मौखिक परीक्षा के अंक पांच से ज्यादा न हों।”
अधिकारी ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया एसएमएस अधिसूचना के जरिए नहीं की जाएगी और गड़बड़ी या अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी।
अधिकारी ने अतीत में शिक्षकों की भर्ती के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षण पेशे से जुड़ी गरिमा को बहाल करने की जरूरत है।
उन्होंने संस्थानों के प्रमुखों, शिक्षा कर्मियों, प्रयोगशाला कर्मचारियों और लाइब्रेरियन के साथ-साथ अन्य सहायक कर्मचारियों की नियुक्ति की जरूरत पर जोर दिया।
अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार ने “घोटाले में फंसे और राजनीतिक रंग में रंगे” विद्यालय सेवा आयोग (एसएससी) पैनल को खत्म कर दिया है और उम्मीदवारों को “पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त नौकरी भर्ती का तोहफा” देने के लिए एक नौकरशाह और रामकृष्ण मिशन के तीन साधुओं को शामिल किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने कुछ लोगों को गलत तरीके से ओबीसी श्रेणी में शामिल किया था और उनकी सरकार ने इसे ठीक करने के लिए कदम उठाए हैं।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने 2024 के एक आदेश में एसएससी के 25,753 उम्मीदवारों की नौकरी रद्द कर दी थी और उच्चतम न्यायालय ने 2025 में इस फैसले को बरकरार रखा।
एसएससी ऐप डाउनलोड करने के बाद, पिछली एसएससी परीक्षाओं के उम्मीदवारों को संदेश के जरिए सूचित किया गया।
उच्चतम न्यायालय ने राज्य के लिये 2016 के उन एसएससी उम्मीदवारों के वास्ते भर्ती परीक्षा आयोजित करने की समय-सीमा 30 मई, 2027 तय की है, जिनकी नौकरियां रद्द कर दी गई थीं।
भाषा प्रशांत दिलीप
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