कोलकाता, पांच सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार स्कूली पाठ्यक्रम में भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी और भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद के योगदान से जुड़े अध्याय को शामिल करेगी।
उन्होंने कहा कि मुखर्जी और प्रणवानंद के बिना पश्चिम बंगाल का अस्तित्व ही नहीं होता।
शुभेंदु ने यहां राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए 300 करोड़ रुपये का ‘समग्र अनुदान’ आवंटित किया है।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार के समय इन विद्यालयों की अवसंरचना और सुविधाएं खराब हो गई थीं, क्योंकि उस सरकार का पूरा जोर केवल ‘खेला’, ‘मेला’, पूजा अनुदान और इमामों के भत्ते पर ही था।
शुभेंदु ने कहा, ‘‘हम स्कूली पाठ्यक्रम में श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणवानंद के योगदान और बलिदान को शामिल करेंगे। इन दोनों ने पश्चिम बंगाल के गठन में अहम भूमिका निभाई थी और भारत के बंटवारे के समय करोड़ों हिंदुओं की जान बचाई थी... हमने राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे और सरकारी मदद पाने वाले विद्यालयों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य कर दिया है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने तुष्टीकरण की नीति के तहत धार्मिक शिक्षण संस्थानों में एक विशेष समुदाय के छात्रों को विशेष रियायतें दीं।
शुभेंदु ने कहा, ‘‘हालांकि, हम एक समावेशी दृष्टिकोण अपनाएंगे।’’
शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधारों की जरूरत को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालयों को उनके प्रदर्शन के आधार पर पुरस्कृत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पाठ्येतर गतिविधियों और शारीरिक शिक्षा को मजबूत करने की जरूरत को भी रेखांकित किया।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘हम अपने बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से तंदुरुस्त रखने के लिए खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों के साथ-साथ एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) पर भी जोर देंगे।’’
उन्होंने कोलकाता के एक मशहूर सरकारी स्कूल में हाल ही में सांप के काटने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पता चलता है कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार ने ‘‘शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी ढांचा बेहतर करने के लिए कुछ नहीं किया’’।
शुभेंदु ने राज्य के करीब 19,000 विद्यालयों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए कहा, ‘‘हमने विद्यालयों में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए समग्र अनुदान के तौर पर 300 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम प्रत्येक स्कूल में मध्याह्न भोजन और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई के अलावा दूसरी गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्कूलों में तबला, सितार और गिटार जैसे संगीत वाद्ययंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘पुस्तकालयों में अच्छी-खासी संख्या में किताबें और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) के जरिये अलग-अलग क्षेत्रों में अधिक प्रशिक्षित और अर्हता प्राप्त कर्मियों की भर्ती की जाएगी... हम ई-लाइब्रेरी बनाने पर भी जोर देंगे।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग 2030 तक नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिणाम देख सकेंगे। साथ ही, उन्होंने बताया कि 1,000 माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ बनाई जाएंगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम छात्रों को केवल किताबी शिक्षा तक ही सीमित रखेंगे, तो हम गलती करेंगे।’’
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि पिछली कमियों की वजह से राज्य की शिक्षा व्यवस्था के कई पहलुओं को नुकसान पहुंचा है।
शुभेंदु ने महिलाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने वाले बहुमुखी प्रतिभा के धनी ईश्वर चंद्र विद्यासागर और पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके गृह जिले पूर्वी मेदिनीपुर में पिछले नौ वर्षों में राज्य में सबसे अधिक उत्तीर्ण प्रतिशत दर्ज किया गया है और कई विद्यालयों के छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
शुभेंदु ने कहा कि उनकी सरकार ने विद्यालयों और महाविद्यालयों के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते और पेंशन लाभ भी बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम पश्चिम बंगाल को एक बार पहले स्थान पर स्थापित करेंगे।’’
भाषा धीरज सुरेश
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