नयी दिल्ली, पांच सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को गोवा के पणजी में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक की अध्यक्षता करेंगे। सरकार द्वारा शनिवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई।
बयान के मुताबिक यह बैठक गृह मंत्रालय के अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा आयोजित की जा रही है और इसकी मेजबानी गोवा सरकार कर रही है।
इसमें कहा गया कि पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री और हर राज्य से दो-दो वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं। केंद्र, राज्यों और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव केंद्र-शासित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।
पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद में गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र के साथ-साथ दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव केंद्र-शासित प्रदेश शामिल हैं। पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद सहित पांच क्षेत्रीय परिषदों की स्थापना ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956’ की धारा 15 से 22 के तहत की गई है।
शाह पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद के अध्यक्ष हैं जबकि गोवा के मुख्यमंत्री इसके मौजूदा उपाध्यक्ष हैं। उपाध्यक्ष का पद सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हर साल बदलता रहता है।
परिषद में मुख्य सचिवों के स्तर की एक स्थायी समिति है। राज्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सबसे पहले समिति चर्चा करती है। विचार-विमर्श के बाद भी जो मामले अनसुलझे रह जाते हैं, उन्हें फिर क्षेत्रीय परिषद के सामने विचार के लिए रखा जाता है।
परिषदों की भूमिका सलाह देने की है, फिर भी ये अलग-अलग क्षेत्रों के बीच आपसी समझ और सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरी हैं।
बयान में कहा गया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सहकारी संघवाद के सिद्धांत पर देश के लिए ‘टीम भारत’ की परिकल्पना की है और क्षेत्रीय परिषदें इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।’’
इसमें कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने सर्वांगीण विकास हासिल करने के लिए सहकारी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की क्षमता का उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
बयान में कहा गया है कि ‘मजबूत राज्यों से ही मजबूत राष्ट्र बनता है’ - इस सिद्धांत के तहत, ये परिषदें उन मुद्दों पर बातचीत के लिए एक व्यवस्थित तंत्र प्रदान करती हैं जो दो या दो से अधिक राज्यों को प्रभावित करते हैं या जिनमें केंद्र और राज्य शामिल होते हैं।
जून 2014 से अब तक, पिछले 12 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रीय परिषद और उनकी स्थायी समितियों की 70 बैठकें हो चुकी हैं।
बयान के मुताबिक ये परिषदें केंद्र और सदस्य राज्यों या केंद्र-शासित प्रदेशों के बीच के विवादों और मुद्दों, साथ ही सदस्य राज्यों के आपसी मामलों और उनके क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों को सुलझाती हैं।
भाषा धीरज पवनेश
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