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भारत-अमेरिका संबंधों में ऊर्जा सहयोग सबसे उभरता क्षेत्र: भारतीय वरिष्ठ अधिकारी

(सागर कुलकर्णी)

वॉशिंगटन, 24 जून (भाषा) अमेरिका में भारतीय मिशन की उप प्रमुख नामग्या खम्पा ने कहा कि कुछ मुद्दों पर अलग नजरिये के बावजूद ऊर्जा सहयोग भारत और अमेरिका के संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बनकर उभरा है।

खम्पा ने अमेरिकी संसद परिसर ‘कैपिटल हिल’ में फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) द्वारा मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि कच्चा तेल, एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस), एलपीजी (द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस) और असैन्य परमाणु ऊर्जा, भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने के प्रमुख क्षेत्र हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ भारत में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और अमेरिका के पास ऊर्जा संसाधनों की प्रचुरता है। इससे एक स्वाभाविक साझेदारी बनती है, जिसे हम और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’

खम्पा ने कहा, ‘‘ कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं और इसमें अमेरिका के साथ हमारी साझेदारी एक प्रमुख कारक है। ये रोजगार, निवेश एवं आर्थिक वृद्धि को भी समर्थन देते हैं और हम इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।’’

भारतीय मिशन की अधिकारी ने दोनों देशों के बीच असैन्य परमाणु सहयोग पर भी बात की, जिसका उल्लेख अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी किया।

उन्होंने कहा, ‘‘ इस संदर्भ में असैन्य परमाणु सहयोग दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। भारत के ऐतिहासिक शांति कानून के पारित होने से वाणिज्यिक सहयोग की नई संभावनाएं बनी हैं और इससे दशकों पहले हुए ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौते की व्यावसायिक संभावनाओं को साकार करने में मदद मिलेगी।’’

अमेरिकी विदेश मंत्रालय में उप सहायक मंत्री बेथनी पॉलोस मॉरिसन ने इसी कार्यक्रम में कहा कि भारत-अमेरिका ऊर्जा व्यापार संबंध तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ हम अमेरिकी तेल, गैस और कोयले का व्यापार कर रहे हैं और दोनों पक्ष हाल ही में पारित शांति अधिनियम के तहत असैन्य परमाणु सहयोग के विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे हैं।’’

मॉरिसन ने बताया कि 2025 के बाद से भारत-अमेरिका हाइड्रोकार्बन व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और यह अब तक 14.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

खम्पा ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को 21वीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण और परिभाषित करने वाली साझेदारियों में से एक माना जाता है।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा