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ओडिशा में धान न बेच पाने के कारण किसान ने आत्महत्या की

भुवनेश्वर, 24 जून (भाषा) ओडिशा के नुआपाड़ा जिले में एक किसान ने 'खरीद टोकन' मिलने के बावजूद कथित तौर पर मंडी में अपना धान न बेच पाने के कारण जान दे दी, हालांकि जिला प्रशासन ने इस आरोप से इनकार किया है।

जिलाधिकारी ने दावा किया कि इस व्यक्ति ने घरेलू विवादों के कारण यह कदम उठाया।

पुलिस ने बताया कि जडामुंडा गांव के निवासी नेपाल माझी (45) ने सोमवार को जहर खा लिया था जिसके बाद एक जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

हालांकि, मृतक के परिजनों ने दावा किया है कि टोकन होने के बावजूद सरकारी मंडी में अनाज न बेच पाने के कारण वह बहुत परेशान था।

नुआपाड़ा के जिलाधिकारी मधुसूदन दास ने किसान की मौत पर चिंता जताई, लेकिन माझी द्वारा धान खरीद संबंधी मुद्दे की वजह से आत्महत्या किए जाने के आरोप को खारिज कर दिया।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, 'किसान को अपना 30 क्विंटल धान बेचने के लिए एक टोकन जारी किया गया था, जो 30 जून तक मान्य था। टोकन की समय-सीमा खत्म होने से आठ दिन पहले यानी 22 जून को उसने ज़हर खा लिया। शुरुआती जांच के मुताबिक, उसने घरेलू विवाद के कारण यह कदम उठाया।'

अधिकारी ने कहा कि प्रशासन ने मृतक किसान के परिवार को आर्थिक सहायता के तौर पर पहले ही 50,000 रुपये दे दिए हैं और टोकन की वैधता खत्म होने से पहले ही उनके धान की खरीद कर ली जाएगी।

किसान के परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों ने न्याय की मांग करते हुए कोमना में राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इस बीच, विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने किसान की मौत के कारणों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय तथ्यान्वेषी दल का गठन किया है, जिसका नेतृत्व ओडिशा विधानसभा में विपक्ष के उप-नेता प्रसन्ना आचार्य करेंगे।

भाषा प्रचेता वैभव

वैभव