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गोवा के मंत्री ने चिकित्सकों से मरीजों के लिए ‘उम्मीद की किरण’ बनने का आग्रह किया

पणजी, 24 जून (भाषा) गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्‍वजीत राणे ने अपनी मां के कैंसर से संघर्ष का निजी अनुभव साझा करते हुए चिकित्सकों से मरीजों के जीवन में “उम्मीद की किरण” बनने का आग्रह किया है।

शहर के पास स्थित गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मंगलवार को 2020 बैच के एमबीबीएस छात्रों के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राणे ने कहा कि उनकी मां का दृढ़ संकल्प और अपने चिकित्सक पर उनका विश्वास, बीमारी से उनकी लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण रहा है।

राणे ने बताया कि उन्होंने अपनी मां से कहा था कि वह उन्हें किसी और बेहतर चिकित्सक के पास ले जाएंगे, लेकिन उनकी मां अपने फैसले पर अडिग रहीं और जिस चिकित्सक पर उन्हें भरोसा था, उसी से इलाज जारी रखने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, ‘मुझे इस व्यक्ति पर भरोसा है, इसलिए अगर मुझे इलाज कराना है, तो तुम मेरे विश्वास को नहीं बदल सकते।’”

राणे ने कहा कि यह एक विडंबना है कि वह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री होने के बावजूद अपने ही घर में चल रही स्थिति को पहचान नहीं पाए। उन्होंने बताया कि साढ़े तीन साल पहले मुंबई में चिकित्सकों ने उन्हें बताया था कि उनकी मां के पास केवल दो महीने का समय बचा है।

उन्होंने कहा, “उनका विश्वास लड़ने की क्षमता से आया। आपके भीतर लड़ने की भावना तभी आती है जब आपके अंदर आत्मविश्वास होता है, जिसे चिकित्सक विकसित करता है।”

राणे ने कहा कि उनकी मां बहादुरी से बीमारी का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को मरीज़ों में भरोसा और उम्मीद जगाने में अपनी भूमिका को समझना चाहिए। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा, 'आपको उम्मीद की वो किरण बनना होगा जो लोगों की जान बचाने में मदद कर सके।'

भाषा तान्या वैभव

वैभव