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मुख्यमंत्री विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में स्टालिन जैसा इशारा किया, द्रमुक पर तीखा हमला बोला

चेन्नई, 23 जून (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन द्वारा पूर्व में किये गए एक इशारे को तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को दोहराया और विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ‘‘शैतान को बुराई के बारे में नहीं बोलना चाहिए।’’

करीब 45 मिनट के अपने भाषण के अंत में विजय ने विपक्ष की खाली सीटों की ओर संकेत करते हुए विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर से पूछा कि क्या वह सदन में हाथ से एक इशारा कर सकते हैं।

विजय ने कहा, ‘‘मैं यह इशारा द्रमुक सदस्यों की मौजूदगी में करना चाहता था, लेकिन वे सभी सदन से बहिर्गमन कर गए हैं। क्या आपकी अनुमति से मैं यह इशारा कर सकता हूं?’’

इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने तुरंत कहा, ‘‘क्यों नहीं, इसमें कुछ गलत नहीं है।’’

इसके बाद, मुस्कुराते हुए विजय ने हाथ से काटने (सफाया करने) जैसा इशारा किया। सत्तापक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर जोरदार समर्थन किया और विधानसभा अध्यक्ष भी मुस्कुराते नजर आए।

विधानसभा चुनाव से पहले मार्च में, कांग्रेस के साथ सीट बंटवारा समझौता होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री और द्रमुक प्रमुख एम. के. स्टालिन ने द्रमुक राज्य मुख्यालय ‘अन्ना अरिवलयम’ से निकलते हुए अपने दायें हाथ से ऐसा ही इशारा किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका यह मतलब था कि समझौता सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। बाद में, स्टालिन ने वही इशारा फिर से दोहराया था।

राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव से संबंधित चर्चा का जवाब देते हुए विजय ने द्रमुक पर निशाना साधा और कहा, ‘‘शैतानों को बुराइयों के बारे में बात नहीं करनी चाहिए।’’ उन्होंने यह बात विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा एक दिन पहले दिये गए बयान के जवाब में कही।

उदयनिधि ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘‘बुराई के सामने चुप रहना भी एक तरह की बुराई है।’’

अपने भाषण में विजय ने द्रमुक नेतृत्व का मजाक उड़ाते हुए एक व्यंग्यात्मक कहानी भी सुनाई। उन्होंने कहा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति एक बच्चे के पिता को ढूंढ रहा था। तभी एक लड़का उसके पास आया और पूछा, ‘‘आप क्या ढूंढ रहे हैं?’’ बुजुर्ग ने जवाब दिया, ‘‘मुझे बताया गया था कि तुम्हारे पिता यहीं होंगे, इसलिए मैं उन्हें ढूंढ रहा हूं। वह कहां हैं? मुझे वह कहीं दिख नहीं रहे हैं।’’

द्रमुक के बहिर्गमन के बाद सदन में पार्टी के विधायकों की अनुपस्थिति, और विधानसभा चुनाव में हार के कारण उसके (द्रमुक के) सत्ता में वापस न आ पाने पर तंज कसते हुए विजय ने कहा, ‘‘हमें भी व्यंग्य करना आता है।’’

भाषा सुभाष मनीषा

मनीषा