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तेजाब हमले के लिए मुआवजे की नीति लैंगिक आधार पर नहीं हो सकती : झारखंड उच्च न्यायालय

रांची, 19 जून (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को तेजाब हमले के एक पीड़ित व्यक्ति को आर्थिक मदद प्रदान करने का निर्देश देते हुए कहा कि मुआवजे की नीतियां लिंग-आधारित नहीं हो सकतीं।

न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंड पीठ ने मुआवज़ा बढ़ाने के अनुरोध संबंधी पीड़ित व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य की नीति में लैंगिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ित कल्याण योजनाओं के तहत मुआवजा लैंगिक भेदभाव के बिना सभी को मिलना चाहिए।

व्यक्ति ने राज्य की मुआवजा नीति के उन प्रावधानों को चुनौती दी थी, जिनके तहत सिर्फ तेजाब हमले की पीड़ित महिलाओं को ही मदद दी जा रही थी और पुरूषों को इसके लिए अयोग्य माना जा रहा था।

याचिका में कहा गया है, ‘‘महिलाओं के अलावा तेजाब हमले के अन्य पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए कोई खास प्रावधान न होने के कारण, पुरूष पीड़ित मुआवजे के लिए अयोग्य हो जाते हैं।’’

अदालत ने कहा कि तेजाब हमले के पीड़ितों के लिए मुआवज़ा नीति लैंगिक आधार पर नहीं हो सकती।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘असल में, मुआवजे की राशि ही लिंग के आधार पर तय नहीं की जानी चाहिए।’’

पीड़ित को पहले 3 लाख रुपये का मुआवज़ा दिया गया था, जिसे अदालत ने बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दिया।

अदालत ने राज्य सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह पीड़ित के उपयुक्त इलाज का इंतजाम करे और उपचार का खर्च उठाए।

भाषा सुभाष पवनेश

पवनेश