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25 दिन से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की हालत स्थिर, गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा इलाज

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। वह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनका इलाज कर रही है। अस्पताल की ओर से गुरुवार को जारी बयान में बताया गया कि वांगचुक की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वह पूरी तरह होश में हैं। उनके सभी जरूरी स्वास्थ्य मानक सामान्य सीमा में हैं।

अस्पताल ने बताया कि सफदरजंग अस्पताल से मेदांता लाए जाने के बाद उनका इलाज उनकी सहमति से किया जा रहा है। डॉक्टरों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है। इससे एक दिन पहले सोनम वांगचुक ने 25 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल को लेकर एक वीडियो जारी किया था। उन्होंने बताया था कि 25 दिनों के अनशन के दौरान उनका 11 किलो वजन कम हो गया है और मांसपेशियों में भी काफी कमी आई है। हालांकि, उन्होंने कहा था कि वह फिलहाल ठीक हैं।

वांगचुक ने 20 जुलाई को हुए 'चलो संसद' मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन जारी रखा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के धैर्य की सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ हुई कार्रवाई को देखकर उनका दिल पिघल गया।

सोनम वांगचुक ने बताया कि कई नेताओं और मंत्रियों ने उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाले पत्र के जरिए भी उनसे अनशन खत्म कर देश की सेवा में वापस लौटने का आग्रह किया गया है। हालांकि, वांगचुक ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि वह अनशन तभी खत्म करेंगे, जब सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन देगी। उन्होंने कहा कि सरकार को यह भरोसा देना चाहिए कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें पुलिस कार्रवाई या जेल की धमकी नहीं दी जाएगी।

वांगचुक ने कहा कि अगर सरकार जल्द ऐसा आश्वासन देती है, तो वह अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए तैयार हैं। लेकिन अगर उन्हें यह भरोसा नहीं मिलता है, तो वह अपना अनशन जारी रखने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल मेदांता अस्पताल में डॉक्टरों की टीम उनकी लगातार निगरानी कर रही है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है।