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अदालत ने 1993 के मुंबई दंगों के मामले में एक व्यक्ति को बरी किया

मुंबई, 19 जून (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने शुक्रवार को वर्ष 1992-93 के मुंबई दंगों के दौरान भांडुप इलाके में एक बेकरी और एक घर जलाने के मामले में 52 वर्षीय व्यक्ति को विश्वसनीय सबूत के अभाव में बरी कर दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.ए. साबले ने फैसला सुनाया कि आरोपी शशि तियार के खिलाफ सबूत ‘अस्पष्ट और सामान्य प्रकृति’ के थे।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 12 जनवरी 1993 को सुबह करीब 10 बजे 40-50 लोगों की भीड़ ने भांडुप (पूर्व) में गावदेवी रोड के पास ‘न्यू बॉम्बे बेकरी’ और उससे सटे एक घर में आग लगा दी थी।

भारी धुआं देखकर पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची, लेकिन किसी की गिरफ्तारी होने से पहले ही दंगाई वहां से भाग गए।

आरोप है कि इस अफरातफरी के दौरान गहनों और सिक्कों सहित संपत्ति भी लूटी गई थी।

इस मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। इससे पहले अलग-अलग मुकदमों में अदालत ने दो सह-आरोपियों को 2001 और 2024 में बरी कर दिया था।

तियार के खिलाफ मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने सिर्फ दो गवाहों से पूछताछ की, लेकिन अदालत ने गौर किया कि उनमें से किसी ने भी आरोपी की कोई भूमिका नहीं बताई।

अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को कथित तौर पर ढहाए जाने के बाद भड़के 1992-93 के मुंबई दंगों में अनुमानित तौर पर 1,000 लोगों की मौत हुई थी।

भाषा संतोष माधव

माधव