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गुजरात सरकार ने शेरों के संरक्षण के लिए कदम उठाए, चुनौतियों से संवेदनशीलता से निपटी: केंद्रीय मंत्री

गांधीनगर, 19 जून (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कहा कि गुजरात सरकार ने एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए कदम उठाए हैं और उनकी सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का समाधान संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ किया है।

यादव की यह टिप्पणी मई में गुजरात के गिर वन क्षेत्र में एशियाई शेर के आठ शावकों की मौत की पृष्ठभूमि में आई है।

गांधीनगर में ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ से इतर बोलते हुए यादव ने कहा कि वह शेरों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के लगातार संपर्क में हैं।

यादव ने कहा, “मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि गुजरात सरकार शेरों के संरक्षण के लिए अच्छा काम कर रही है और संक्रमण समेत सभी चुनौतियों से संवेदनशीलता के साथ निपटा जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “मैं (गुजरात के) वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के संपर्क में हूं, वह स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। मैंने हाल में गिर का दौरा भी किया। (शेर शावकों की मौत के) स्थानीय कारणों का भी पता लगाया जा रहा है और स्थिति पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है।”

मई में गिर वन क्षेत्र में शेर के आठ शावकों की मौत हो गई थी। शुरू में माना जा रहा था कि इन सभी की मौत ‘बेबेसिया’ संक्रमण (किलनी से फैलने वाला संक्रमण) की वजह से हुई है। लेकिन इस महीने की शुरुआत में मोढवाडिया ने बताया कि असल में इन शावकों की मौत गर्मी, कमजोरी और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की वजह से हुई थी।

पिछले साल नवंबर में मोढवाडिया ने कहा था कि भटककर गुजरात पहुंचा एक बाघ दाहोद जिले में स्थित रतनमहल अभयारण्य में स्थायी रूप से रहने लगा है। यह बाघ पहली बार फरवरी 2025 में कैमरे की नजरों में आया था।

बाघ की मौजूदगी और रतनमहल को ‘बाघों के निवास स्थान’ का दर्जा दिलाने की गुजरात वन विभाग की कोशिशों के बारे में पूछे जाने पर यादव ने कहा कि यह मान्यता तय नियमों और प्रक्रियाओं के आधार पर ही मिलती है।

उन्होंने गांधीनगर में एक अन्य कार्यक्रम में संवाददाताओं से बातचीत में कहा, “इस मामले में एक प्रक्रिया और प्रोटोकॉल हैं, जिनका पालन किया जाना है। हम गुजरात वन विभाग के साथ मिलकर सामने आने वाले मुद्दों पर गौर देंगे और उसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे।”

यादव ने कहा कि गुजरात में चीतों को बसाने के बारे में फैसला तय नियमों के अनुसार लिया जाएगा।

वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 1989 में गुजरात में बाघों को विलुप्त घोषित कर दिया गया था। हाल में बाघ के बसने से राज्य में इस नस्ल के जीवों की संख्या फिर से बढ़ने की उम्मीदें जगी हैं। गुजरात को एशियाई शेरों का आखिरी प्राकृतिक रूप से बचा ठिकाना माना जाता है।

यादव ने कहा, “कांग्रेस अपने पतन के लिए खुद जिम्मेदार है। किसी देश में सकारात्मक राजनीति ही सफल होती है, नकारात्मक नहीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 25 साल पूरे कर लिए हैं, जबकि कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने अपना नाम तक बदल लिया है।”

उन्होंने कहा, “यह अब ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया)’ बन गया है, लेकिन तब से कई पार्टियां इससे दूर हो गई हैं। तमिलनाडु में कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा, लेकिन बाद में उसने सत्ताधारी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) से हाथ मिला लिया। आज पार्टी (कांग्रेस) पूरी तरह से दिशाहीन है।”

यादव ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के लिए पिछले 12 वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना था कि संसाधन देश के सबसे गरीब नागरिकों तक पहुंचें।

उन्होंने ‘विकसित भारत संकल्प सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा, “इन 12 वर्षों में सबसे बड़े उद्देश्यों में से एक देश की सबसे बड़ी चुनौती से निपटना रहा है, जो यह सुनिश्चित करना है कि संसाधन सबसे गरीब नागरिकों तक पहुंचें।”

कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, गांधीनगर से विधायक रीता पटेल और गांधीनगर की महापौर मीरा पटेल समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

यादव ने कहा कि चाहे आयुष्मान योजना हो या डिजिटल क्रांति, इन पहलों ने यह सुनिश्चित किया कि सरकारी लाभ और संसाधन अंतिम पंक्ति के लाभार्थी तक भी पहुंचें।

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते 12 साल भरोसे, विकास और जन-कल्याण के साल रहे हैं। सड़क, पुल, रेलवे, ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, शिक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं तक सभी की पहुंच सुनिश्चित की गई है।”

यादव ने कहा कि सरकार ने इन 12 वर्षों में देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है और भारत को सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त बनाया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने नवाचार, दृष्टिकोण और अवसर उपलब्ध कराए हैं तथा देश एक वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरा है।

यादव ने 21 जून को फिर से होने वाली नीट-यूजी 2026 के बारे में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगातार तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं।

उन्होंने कहा, “सरकार इस मामले को लेकर संवेदनशील है। वह छात्रों के लिए पारदर्शी, सुरक्षित, सम्मानजनक और भरोसेमंद व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।”

भाषा पारुल माधव

माधव