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सेबी ने एआईएफ योजना पेश करने की प्रक्रिया तेज करने के लिए ‘गरुड़’ प्रणाली को मंजूरी दी

मुंबई, 19 जून (भाषा) भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के लिए नई योजनाएं शुरू करने की प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से ‘गरुड़’ नामक प्रणाली को मंजूरी दे दी।

‘गरुड़’ (ग्रीन-चैनल: एआईएफ रोलआउट अपॉन डॉक्यूमेंट एक्नॉलेजमेंट) के तहत अब एआईएफ अपने नियोजन ज्ञापन (पीपीएम) दाखिल करने के 10 कार्यदिवस के भीतर नई योजनाओं के लिए धन जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे, जबकि वर्तमान में इसके लिए 30 दिन तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।

सेबी ने निदेशक मंडल की बैठक के बाद जारी बयान में कहा कि इस व्यवस्था को सेबी (वैकल्पिक निवेश कोष) विनियमन, 2012 में संशोधन के माध्यम से मंजूरी दी गई है।

नए प्रावधान के अनुसार गैर-मान्यता प्राप्त निवेशक योजनाओं के लिए नई योजनाएं शुरू करने की समयसीमा घटाकर 10 कार्यदिवस कर दी गई है। हालांकि, बड़े मूल्य कोष (एलवीएफ), केवल मान्यता प्राप्त निवेशक वाली योजनाएं और एंजेल कोष इस श्रेणी में शामिल नहीं होंगे।

सेबी का मानना है कि एआईएफ उद्योग के तेज विस्तार और योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कदम पूंजी के अधिक तेज और दक्ष उपयोग में सहायक होगा।

आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च, 2026 तक पंजीकृत एआईएफ की संख्या बढ़कर 1,849 हो गई, जो पांच वर्ष पहले 732 थी। इस दौरान लगभग 135 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, एआईएफ द्वारा जुटाई गई कुल प्रतिबद्ध पूंजी 15.74 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि 31 दिसंबर, 2025 तक कुल शुद्ध निवेश 6.45 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

इसके अलावा, केवल मान्यता प्राप्त निवेशक और एंजेल कोषों के लिए सेबी ने नियोजन ज्ञापन को मर्चेंट बैंकर के माध्यम से दाखिल करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।

अब कोष प्रबंधक सीधे सेबी के पास पीपीएम दाखिल कर सकेंगे, बशर्ते इसके साथ एआईएफ प्रबंधक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और अनुपालन अधिकारी का एक आश्वासन पत्र संलग्न हो।

इन योजनाओं को पीपीएम दाखिल होते ही बिना किसी समीक्षा अवधि के तत्काल प्रभाव से शुरू करने की अनुमति होगी।

मान्यता प्राप्त निवेशक वे होते हैं, जो निर्धारित आय या शुद्ध संपत्ति मानदंडों को पूरा करते हैं और जटिल निवेश उत्पादों के जोखिमों को समझने में सक्षम माने जाते हैं।

इसके साथ ही सेबी के निदेशक मंडल ने सोशल स्टॉक एक्सचेंज (एसएसई) के लिए क्षमता निर्माण कोष (सीबीएफ) के प्रबंधन और शेष राशि को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) से हटाकर नवगठित ‘सोशल स्टॉक एक्सचेंज-कैपेसिटी बिल्डिंग फाउंडेशन’ (एसएसई-सीबीएफ) को सौंपने को मंजूरी दी।

भाषा

योगेश रमण

रमण