बलिया/लखीमपुर खीरी/लखनऊ, 19 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच कथित “टूट” को लेकर चल रही जुबानी जंग लगातार तेज होती जा रही है। दोनों दलों के नेता एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगा रहे हैं।
सुभासपा अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में एक बार फिर सपा में “टूट” का दावा करते हुए कहा, “बाकी बची हुई पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष असली चाचा (शिवपाल सिंह यादव) ही बनेगा, क्योंकि वही दोबारा पार्टी खड़ा कर सकते हैं।”
राजभर ने अपने पोस्ट में सपा पर निशाना साधते हुए पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने सपा सांसद रुचि वीरा का जिक्र करते हुए तंज कसा और यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में कई वर्गों के लोग दूर होते जा रहे हैं।
उन्होंने सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव पर भी तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने उनके और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया था।
राजभर ने यह भी दावा किया कि सपा में आंतरिक विवाद और टूट की स्थिति बन रही है।
राजभर ने बलिया को “बागियों की भूमि” बताते हुए संकेत दिया कि राजनीतिक नेतृत्व वहीं से उभरता है।
वहीं दूसरी ओर, सलेमपुर से सपा सांसद रमाशंकर विद्यार्थी राजभर ने इन आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने दावा किया कि सुभासपा के “चार विधायक पहले ही टूट चुके हैं” और यदि सपा दरवाजा खोले तो कई नेता पार्टी में शामिल हो सकते हैं।
बलिया में देर रात पत्रकारों से बातचीत में रमाशंकर ने सुभासपा अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राजभर केवल भाजपा के दबाव में बयान दे रहे हैं और उनकी पार्टी का राजनीतिक आधार कमजोर हो रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा के कई सांसद और विधायक सपा के संपर्क में हैं।
सपा सांसद ने यह भी कहा कि आगामी चुनाव में सपा और ‘इंडिया’ गठबंधन सीटों के बंटवारे में लचीलापन रखेगा और मजबूत उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने एआईएमआईएम के प्रति नरम रुख दिखाते हुए विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की।
इस बीच, सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी राजभर के दावों को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि राजभर पर भाजपा का दबाव है और उनके बयान गंभीरता से लेने योग्य नहीं हैं।
दोनों दलों के बीच यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में तेज हुई है जब प्रदेश में आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं और विपक्षी तथा सत्तारूढ़ खेमों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
लखीमपुर खीरी से मिली खबर के मुताबिक समाजवादी पार्टी (सपा) के धौरहरा से सांसद आनन्द भदौरिया और खीरी से सांसद उत्कर्ष वर्मा ने भाजपा में शामिल होने की खबरों का जोरदार खंडन किया है। कुछ सोशल मीडिया चैनलों और एक फेसबुक पेज पर फैलाई जा रही इन खबरों को दोनों नेताओं ने बेबुनियाद और पार्टी व अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया।
जिला सपा अध्यक्ष रामपाल सिंह यादव और पूर्व जिला अध्यक्ष अनुराग पटेल के साथ दोनों सांसद आज सदर कोतवाली पहुंचे।
उन्होंने संबंधित फेसबुक पेज और सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ अलग-अलग शिकायत दी और पुलिस से बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।
पत्रकारों से बातचीत में सांसद भदौरिया और वर्मा ने कहा “ पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के एजेंडे पर चुने गए सपा के सभी 37 सांसद पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के साथ चट्टान की तरह एकजुट खड़े हैं।'_
उन्होंने कहा कि विरोधियों की ऐसी बदनाम करने वाली हरकतें 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की बढ़ती राजनीतिक ताकत से उनकी घबराहट दिखाती हैं।
भाषा सं आनन्द मनीषा राजकुमार रंजन
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