रांची, 19 जून (भाषा) झारखंड में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को दावा किया कि एक दिन पहले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर की दरार और गहरी हो गई है।
भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) ‘‘लूट और भ्रष्टाचार’’ के एकमात्र साझा कार्यक्रम पर चल रहा है।
कांग्रेस ने गठबंधन सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन के विधायकों पर उसके (कांग्रेस) उम्मीदवार के पक्ष में वोट न देने का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी राज्य विधानसभा में अपनी ताकत बढ़ाएगी, ताकि राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए उसे दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।
‘क्रॉस-वोटिंग’ के बीच, बृहस्पतिवार को झारखंड की दो राज्यसभा सीट में से एक पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी ने कांग्रेस के प्रणव झा को हराकर जीत दर्ज की।
वहीं, दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम निर्वाचित हुए।
राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा नीत राजग के 24 विधायक हैं, जबकि राज्यसभा की प्रत्येक सीट पर जीत के लिए कम से कम 28 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता थी। इस तरह, राजग को और चार विधायकों के समर्थन की जरूरत थी।
विधानसभा में, झामुमो और कांग्रेस सहित 'इंडिया' गठबंधन के 56 सदस्य हैं।
भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा, ‘‘चुनाव परिणामों ने सत्तारूढ़ गठबंधन की पोल खोल दी है। कांग्रेस ने राजद (राष्ट्रीय जनता दल) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन पर विश्वासघात का आरोप लगाया है, जबकि राजद ने कांग्रेस के झारखंड प्रभारी को 'बिकाऊ' कहा है। पूरा गठबंधन केवल एक ही साझा कार्यक्रम पर चल रहा है, और वह है लूट और भ्रष्टाचार।’’
कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू ने राजद और भाकपा (माले) लिबरेशन पर ‘‘विश्वासघात’’ का आरोप लगाया है। इसके जवाब में, राजद ने कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले आत्मावलोकन करना चाहिए, जबकि भाकपा (माले) लिबरेशन ने भी इन आरोपों की कड़ी निंदा की।
झारखंड सरकार में राजद के कोटे से मंत्री संजय प्रसाद यादव ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि राजद और भाकपा (माले) लिबरेशन को बदनाम किया जा रहा है, जबकि कांग्रेस इस चुनाव में अपने खुद के विधायकों के वोट हासिल करने में भी नाकाम रही।
यादव ने आरोप लगाया, ‘‘हाल में, राज्यसभा के लिए बिहार में हुए चुनाव में कांग्रेस के विधायक भाजपा के पक्ष में मतदान करते हुए रंगे हाथों पकड़े गए थे। अब, वे विश्वासघात के आरोप लगा रहे हैं। ऐसा करना राजद के खून में नहीं है।’’
बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में, नथवाणी को 28 मत मिले जबकि झा को केवल 20 मत ही प्राप्त हुए। वहीं, झामुमो के उम्मीदवार को 30 मत प्राप्त हुए, जबकि तीन वोट अमान्य घोषित कर दिए गए जिनमें भाजपा के दो और कांग्रेस का एक विधायक था।
राजद के राष्ट्रीय महासचिव भोला प्रसाद यादव ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैं कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू के आरोपों की निंदा करता हूं और सुझाव देता हूं कि पार्टी आत्मावलोकन करे। मैं पार्टी का पोलिंग एजेंट था। मतदान के बाद, मैंने अपने पार्टी आलाकमान और झारखंड के मुख्यमंत्री को आश्वासन दिया था कि राजद के सभी चार वोट कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में पड़े हैं।’’
यादव ने दावा किया कि ‘‘निराधार आरोप’’ पार्टी (कांग्रेस) की अपनी गलतियों को छिपाने के लिए लगाया गया है।
भाकपा (माले) लिबरेशन के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने भी कहा कि पार्टी के दोनों विधायकों ने ‘इंडिया’ गठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में ही अपना वोट डाला था।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘यह कांग्रेस है, जो अपने विधायकों को संभाल नहीं सकी। कांग्रेस का बिकाऊ होने का पुराना इतिहास रहा है।’’
बाद में, राजू ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में दावा किया कि झा को मिले 20 मतों में से 16 वोट कांग्रेस विधायकों के थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी के विधायकों ने नथवाणी के लिए वोट नहीं किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इसे प्रमाणित कर सकता हूं क्योंकि झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के एजेंट के तौर पर, मैंने हर वोट को उस वक्त देखा जब (विधायकों ने) उसे मतपेटी में डाला।’’
‘इंडिया’ गठबंधन के 56 सदस्यों में झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के दो सदस्य शामिल हैं।
राजग के 24 विधायकों में से 21 भाजपा से हैं, जबकि एक-एक विधायक लोजपा (राम विलास), आजसू पार्टी और जद(यू) के हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का एक विधायक है।
भाषा
सुभाष माधव
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