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पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी प्रासंगिक : राजनाथ सिंह

( तस्वीरों सहित )

नागपुर, 19 जून (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी 1947 में थीं। साथ ही उन्होंने कहा कि जो राष्ट्र अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं करने में सक्षम होता है वही आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकता है।

रक्षा मंत्री नागपुर के अंबाझरी स्थित सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ‘यंत्र इंडिया लिमिटेड’ (वाईआईएल) में 10,000 टन क्षमता वाले ‘एल्यूमिनियम एक्सट्रूज़न प्रेस’ की आधारशिला रखने के लिए आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। यह नया केन्द्र अहम एल्यूमिनियम घटकों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि जब युद्ध छिड़ता है तो आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो सकती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में हर देश चाहता है कि आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन देश के भीतर ही हो।’’

सिंह ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी जरूरतों को स्वयं पूरा करने में सक्षम होता है, वह आत्मविश्वास के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता है।

रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘ पारंपरिक सैन्य क्षमताएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी 1947 में थीं।’’ सिंह ने साथ ही कहा कि 2047 में भी इनका महत्व बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि इसी कारण सैन्य-औद्योगिक आधार (मिलिट्री इंडस्ट्रियल बेस) भविष्य में भी जरूरी बने रहेंगे।

सिंह ने बताया कि 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1,78,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया, जबकि 2014 में यह सिर्फ़ 46,000 करोड़ रुपये था।

उन्होंने कहा कि इसी तरह, देश का रक्षा निर्यात भी 2014 के 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 40,000 करोड़ रुपये हो गया है।

भाषा शोभना मनीषा

मनीषा