नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु विधानसभा में 13 मई के विश्वास मत में कथित अनियमितताओं और विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों की जांच करने का अनुरोध करने वाली याचिका शुक्रवार को यह कहते हुए खारिज कर दी कि यह ‘‘अस्पष्ट और अनर्गल आरोपों' पर आधारित है।
तमिलनाडु में 13 मई को, सी जोसफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के बहिर्गमन के बीच ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के 25 बागी विधायकों के समर्थन से विश्वास मत हासिल कर एक बड़ी बाधा को पार कर लिया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ उस याचिक पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दावा किया गया कि तमिलनाडु में अन्य दलों के कुछ विधायक कथित तौर पर खरीद-फरोख्त में शामिल थे और टीवीके द्वारा कथित रूप से कुछ विधायकों को मोटी रकम दी गई थी।
याचिका में कहा गया कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जानी चाहिए और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए।
याचिकाकर्ता के.के. रमेश की ओर से पेश वकील सी.आर. जया सुकिन ने पीठ को बताया कि यह याचिका एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाती है क्योंकि देशभर में सत्तारूढ़ दल लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रहे हैं।
उन्होंने कुछ राज्यों में विधायकों को कथित तौर पर विशेष विमानों से ले जाए जाने और उनके अन्य राजनीतिक दलों में शामिल होने से पहले इस्तीफा देने के उदाहरणों का हवाला दिया।
सुकिन ने दलील दी, ‘‘इस देश में, हर सत्तारूढ़ दल लोकतांत्रिक संस्थाओं को नष्ट कर रहा है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों को राजनीतिक दल बदलने के लिए या तो मोटी रकम दी जा रही है या जेल भेजने की धमकी दी जा रही है।
पीठ ने कहा कि उसके समक्ष दायर याचिका ‘अस्पष्ट और निराधार’ आरोपों पर आधारित है तथा दावों की पुष्टि करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई विश्वसनीय सामग्री उपलब्ध नहीं है।
याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि इस पर विचार करने का कोई आधार नहीं है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि तमिलनाडु विधानसभा में शक्ति परीक्षण कथित तौर पर लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुसार नहीं किया गया था।
इसमें दावा किया गया, ‘‘तमिलनाडु विधानसभा में, अन्य दलों के कुछ विधायक कथित तौर पर खरीद-फरोख्त में शामिल थे, और टीवीके द्वारा कुछ विधायकों को मोटी रकम दी गई।’’
अभिनेता से नेता बने सी जोसफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
टीवीके 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अपने दम पर बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन विजय सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) से समर्थन प्राप्त करने में सफल रहे, जिससे 120 विधायकों को एकत्र कर 118 के आंकड़े को पार कर लिया।
विपक्ष ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए थे जिन्हें विजय ने खारिज कर दिया था।
भाषा
खारी संतोष
संतोष