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शरणार्थी होने के बावजूद ऑस्ट्रेलिया की टीम में जगह बनाने से खुश हैं अवर माबिल

अलामेडा (अमेरिका), 19 जून (एपी) अवर माबिल का चेहरा पल भर में खुशी से खिल उठा। वह मुस्कुराए और अपनी भावनाओं को काबू में रखने की कोशिश की। ऑस्ट्रेलिया के इस अनुभवी फॉरवर्ड ने शायद ही कभी इस तरह की प्रतिक्रिया की कल्पना की होगी।

इसका फुटबॉल के परिणाम से भी कोई लेना-देना नहीं था। बल्कि यह एक ऐसा चिंतन था जो उन्हें शरणार्थी के रूप में अपने उथल-पुथल भरे बचपन की याद दिलाता था। यह उस खुशी के कारण था जो शरणार्थी होने के बावजूद उन्हें ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने से मिली थी।

फुटबॉल के खेल में उन्हें ऑस्ट्रेलिया में नए सिरे से जीवन शुरू करने का मौका मिला था। वह मूलरूप से कीनिया के रहने वाले हैं और ऑस्ट्रेलिया की टीम में शामिल कुछ शरणार्थी खिलाड़ियों का हिस्सा हैं।

माबिल ने जब संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों की बीच डेविड बशीर का जाना पहचाना चेहरा दिखा तो वह मुस्कुराने लगे। बशीर ऑस्ट्रेलिया के एसबीएस नेटवर्क के लंबे समय से कमेंटेटर हैं।

माबिल ने कहा, ‘‘मैं आपको देखते हुए बड़ा हुआ हूं।’’

30 वर्षीय माबिल का जन्म कीनिया के काकुमा में सूडानी माता-पिता के घर हुआ था, जो गृहयुद्ध से बचकर वहां गए थे। उन्होंने 20 साल पहले 10 वर्ष की उम्र में ऑस्ट्रेलिया में शरण ली थी और यही फुटबॉल खेलना शुरू किया था।

संयोग से माबिल ऐसे समय में अपनी कहानी सुना रहे थे जबकि शरणार्थी सप्ताह मनाया जा रहा है। शनिवार को विश्व शरणार्थी दिवस है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह शरणार्थी सप्ताह है। मैं दुनिया भर में विस्थापित हुए सभी लोगों से कहना चाहता हूं कि हम आपके साथ हैं। हम इस समय एक वैश्विक मंच पर हैं। एक बड़े टूर्नामेंट में खेल रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि सब कुछ संभव है, इसलिए आगे बढ़ते रहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी टीम में कई शरणार्थी खिलाड़ी भी हैं। जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि हम सब एक ही दुनिया से जुड़े हैं। अब हम ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।’’

वह अपने साथी और अफ्रीका से आए शरणार्थी खिलाड़ियों मो टूरे और नेस्टोरी इरनकुंडा के लिए खुद को बड़े भाई की तरह मानते हैं।

एपी

पंत सुधीर

सुधीर