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न्यायालय ने कर्नाटक के दो अधिकारियों से जुड़े मानहानि विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा

नयी दिल्ली, 14 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के कर्नाटक कैडर की अधिकारी रोहिणी सिंदूरी और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की अधिकारी डी रूपा मौदगिल के बीच लंबे समय से जारी मानहानि विवाद को मध्यस्थता के लिए भेज दिया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस लंबी कानूनी लड़ाई से दोनों वरिष्ठ सिविल सेवकों के करियर को नुकसान हो रहा है।

न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की अवकाशकालीन पीठ ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ को अधिकारियों के बीच आपसी सहमति से समझौता कराने के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया।

न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, “वे दोनों एक-दूसरे का करियर बर्बाद कर रही हैं।”

पीठ ने कहा कि उसकी राय है कि विवाद को लगातार मुकदमेबाजी के बजाय मध्यस्थता के जरिये सुलझाया जा सकता है।

उसने कहा, “मौजूदा मामले में शीर्ष अदालत का मानना ​​है कि विवाद को मध्यस्थता के जरिये सुलझाया जा सकता है।”

पीठ ने कहा, “उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश कुरियन जोसेफ को मध्यस्थ नियुक्त किया जाता है। संबंधित पक्षों को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जोसेफ के समक्ष पेश होना होगा।”

उसने कहा, “अंतरिम राहत के तौर पर दोनों पक्षों के बीच चल रहे दोनों मामलों में आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी।”

यह विवाद 2023 में दोनों अधिकारियों की ओर से एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से लगाए गए आरोपों से शुरू हुआ, जिसके बाद उन्होंने मानहानि के मुकदमे दायर किए।

मौदगिल की शिकायत पर शुरू की गई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को चुनौती देने वाली सिंदूरी की याचिका को कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने के बाद यह मामला शीर्ष अदालत पहुंचा।

भाषा पारुल सुरेश

सुरेश