(तस्वीरों के साथ)
कोट्टायम (केरल), 31 मई (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के परोक्ष संदर्भ में रविवार को कहा कि अगर सकारात्मक गतिविधियों और उपलब्धियों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं की गई, तो युवा अंततः ‘‘कॉकरोच’’ का अनुसरण करेंगे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को सही राह दिखाने और जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए रचनात्मक पत्रकारिता आवश्यक है।
मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ की 140वीं वर्षगांठ के समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राधाकृष्णन ने कहा कि सकारात्मक विकास पर मीडिया में अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को सही जानकारी और आदर्श मिल सकें।
उन्होंने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी तरह से रिपोर्टिंग की जानी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी। अन्यथा, वे रुचि खो देंगे और अंततः ‘कॉकरोच’ की राह पर चल पड़ेंगे।”
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्होंने उन मुद्दों पर अत्यधिक ध्यान देने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया, जो समय की कसौटी के हिसाब से उपयुक्त नहीं हैं।
जाहिर तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया अकाउंट) को लेकर विशेष रूप से युवाओं के बीच उत्पन्न सोशल मीडिया हलचल का जिक्र करते हुए, उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में कोई चीज एक ही दिन में इतना ध्यान आकर्षित करने लायक है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर कोई चीज वाकई अच्छी है, तो लोग एक हफ्ते, 10 दिन या यहां तक कि एक महीने बाद भी उसके महत्व को पहचानते रहेंगे।’’
राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘उनके बारे में कोई नहीं जानता। अचानक, वे हर जगह फैल गए हैं। यह ज्यादा समय तक नहीं चल सकता।’’
उन्होंने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि नेक विचार और सकारात्मक संदेश समाज के हर कोने तक पहुंचने चाहिए तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा अदालत में एक सुनवाई के दौरान की गई ‘‘कॉकरोच’’ और ‘‘परजीवी’’ संबंधी टिप्पणी से उत्पन्न विवाद के बाद यह व्यंग्यात्मक मंच सामने आया।
बाद में, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि ‘‘फर्जी डिग्रियों’’ के माध्यम से विधि पेशे में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों को लेकर उनके द्वारा की गई टिप्पणी को गलत तरीके से उद्धृत किया गया।
राधाकृष्णन ने इस बात पर जोर दिया कि रचनात्मक पत्रकारिता समाज में विश्वास पैदा करने में मदद करती है, सामूहिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती है और नागरिकों को राष्ट्रीय विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने कहा कि करुणा, वैज्ञानिक प्रगति, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों को उजागर करके समाचार पत्र सामाजिक परिवर्तन के शक्तिशाली साधन बन सकते हैं।
उपराष्ट्रपति ने सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने, शिक्षा का प्रसार करने, सांस्कृतिक जड़ों को संरक्षित करने और रचनात्मक सार्वजनिक चर्चा को प्रोत्साहित करने के लिए ‘दीपिका’ की प्रशंसा भी की।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
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