नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) अदालत शुल्क संग्रह पर राष्ट्रव्यापी डेटा मांगने वाली एक आरटीआई अर्जी को चार सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के पास भेजा गया, लेकिन अधूरी जानकारी उपलब्ध कराये जाने की वजह से केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईएसी) ने नये सिरे से जवाब देने का निर्देश दिया तथा अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत आवेदन करने वाले व्यक्ति ने अखिल भारतीय आधार पर ई-कोर्ट शुल्क सहित अदालत शुल्क के वार्षिक संग्रह, 1 जून 2014 से प्राप्त हुई कुल राशि, राज्य-वार वार्षिक आंकड़ों तथा ऐसे संग्रह और संबंधित आवंटन के उपयोग का विवरण मांगा था।
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश के अनुसार, यह अर्जी कानून और न्याय मंत्रालय के तहत कानूनी मामलों के विभाग में दायर की गई थी और बाद में इसे वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), इसके संस्थागत वित्त-1 (आईएफ-1) प्रभाग, भारतीय औद्योगिक वित्त निगम लिमिटेड (आईएफसीआई) और आखिरकार स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल) को स्थानांतरित की गई थी।
आईएफ-1 प्रभाग ने आवेदक को सूचित किया कि मांगी गई जानकारी उसके पास उपलब्ध नहीं है और आवेदन आईएफसीआई को स्थानांतरित कर दिया गया।
बदले में, आईएफसीआई ने कहा कि प्रश्न एसएचसीआईएल से संबंधित प्रतीत होते हैं और उसने अर्जी कंपनी को भेज दी।
एसएचसीआईएल ने उन 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए ई-कोर्ट शुल्क संग्रह का विवरण प्रदान किया, जहां वह ई-कोर्ट सेवाएं संचालित करता है। हालांकि, जून 2014 से अदालत शुल्क संग्रह से संबंधित दूसरे प्रश्न और संग्रह के उपयोग के संबंध में तीसरे प्रश्न के संबंध में उसने कहा कि मांगी गई जानकारी उस पर लागू नहीं थी।
सुनवाई के दौरान, अपीलकर्ता ने कहा कि पहले दो बिंदुओं पर दी गई जानकारी अधूरी थी और अदालती शुल्क के उपयोग पर कोई जानकारी नहीं मिली थी, जो कानून और न्याय मंत्रालय से संबंधित थी।
आयोग ने पाया कि आवेदन कानूनी मामलों के विभाग से डीएफएस, फिर आईएफ-1 प्रभाग, आईएफसीआई और आखिरकार एसएचसीआईएल में स्थानांतरित किया गया था।
आयोग ने कहा कि कि एसएचसीआईएल ने केवल पहले दो बिंदुओं के उत्तर दिए थे और तीसरे बिंदु पर जानकारी उसके पास उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी।
आदेश में कहा गया, ‘‘स्टॉकहोल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के सीपीआईओ (केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी) ने आरटीआई अर्जी के केवल पहले और दूसरे प्रश्न का जवाब दिया और तीसरे प्रश्न के संबंध में जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही थी।’’
एसएचसीआईएल की इस दलील को दर्ज करते हुए कि वह अपनी प्रतिक्रिया पर फिर से विचार करेगी और विसंगति को दूर करेगी, सीआईसी ने कंपनी के सीपीआईओ को पहले और दूसरे प्रश्न का संशोधित उत्तर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
आयोग ने कानूनी मामलों के विभाग के सीपीआईओ को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया, जिसमें पूछा गया कि पूरे आवेदन को गलत तरीके से डीएफएस में स्थानांतरित करने और सुनवाई के दौरान बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने के लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 20 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए।
अपीलकर्ता के 12 अक्टूबर 2024 के पत्र का जवाब नहीं देने के लिए कानून और न्याय मंत्रालय में प्रथम अपीलीय प्राधिकरण को एक अलग कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
भाषा सुभाष नरेश
नरेश