(सुमीर कौल)
श्रीनगर/जम्मू, 31 मई (भाषा) पाकिस्तान सीमा पार से जम्मू-कश्मीर में जानबूझकर गैरजरूरी दूरसंचार सिग्नल भेजकर अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार मानदंडों का उल्लंघन कर रहा है और उसकी इस नापाक हरकत का उद्देश्य केंद्र-शासित प्रदेश, खास तौर पर जम्मू क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी समूहों को संचार की गुप्त सुविधा प्रदान करना है। अधिकारियों ने रविवार को यह बात कही।
अधिकारियों ने कहा कि हाल में भेजे गए सिग्नल, खास तौर पर पीर पंजाल पर्वतमाला के दक्षिण में भेजे गए सिग्नल संकेत देते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास दूरसंचार टावरों की स्थापना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिनके सिग्नल जम्मू की विभिन्न जेल तक पहुंचते हैं, जहां कुख्यात आतंकवादी कैद हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी के पहाड़ इनमें से ज्यादातर सिग्नल को प्राकृतिक रूप से रोक देते हैं, लेकिन जम्मू के मैदानी इलाकों की सपाट स्थलाकृति के कारण ये सिग्नल भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, कठुआ, राजौरी और पुंछ जैसे सीमावर्ती जिलों के अलावा जम्मू के अत्यधिक संवेदनशील कोट बलवाल जेल क्षेत्र में पाकिस्तान से भेजे जाने वाले सिग्नल की पहचान की गई है।
उन्होंने बताया कि आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र की कुछ जेल में अवैध तरीके से पहुंचाए गए मोबाइल फोन का इस्तेमाल कथित तौर पर अभी भी जारी है और इन प्रतिष्ठानों में वर्तमान में इस्तेमाल किए जा रहे जैमर पाकिस्तान से भेजे जाने वाले सिग्नल को अवरुद्ध करने तथा कैदियों की ओर से किए जाने वाले संचार को रोकने में नाकाम रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में 14 जेल और दो सुधार गृह हैं।
अधिकारियों के अनुसार, चूंकि जम्मू-कश्मीर का सुरक्षा वातावरण बेहद संवेदनशील है, जो सीमा पार से भेजे जाने वाले सिग्नल, ड्रोन संचालित उपकरणों और बदलते दूरसंचार स्पेक्ट्रम के कारण और भी जटिल हो जाता है, इसलिए यहां पारंपरिक जैमर के बजाय अगली पीढ़ी के उपकरण लगाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक जैमर न केवल सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी का जोखिम बढ़ाते हैं, बल्कि आसपास के नागरिक समुदायों को भी काटते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि नयी प्रौद्योगिकी विशिष्ट क्षेत्रों के भीतर सक्रिय अनधिकृत उपकरणों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के मकसद से तैयार की गई है।
उन्होंने बताया कि 2019-20 में सुरक्षा एजेंसियों ने सीमा पार मौजूद अनधिकृत संचार नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया था और ‘एन्क्रिप्शन’ प्रणाली में सेंध लगाते हुए उन्हें सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया था।
अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा प्रयासों का भी यही हश्र होगा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से अंतरराष्ट्रीय सीमा और एलओसी पर दूरसंचार टावर की रणनीतिक स्थापना संयुक्त राष्ट्र की संस्था अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) के संविधान के अनुच्छेद-45 का उल्लंघन करती है। यह अनुच्छेद सभी 193 सदस्य देशों को झूठे, भ्रामक या गैरजरूरी सिग्नल के प्रसारण को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने तथा अनधिकृत स्टेशन का पता लगाने में सक्रिय रूप से सहयोग करने का आदेश देता है।
आईटीयू के रेडियोसंचार ब्यूरो ने बार-बार दोहराया है कि इस तरह के सिग्नल का प्रसारण पूरी तरह से वर्जित है।
अधिकारियों के मुताबिक, ये टावर ‘कोड-डिवीजन मल्टीपल एक्सेस (सीडीएमए)’ प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें एक चीनी कंपनी की ओर से खास तौर पर वाईएसएमएस सेवाओं के संचालन के लिए तैयार की गई उच्च श्रेणी की ‘एन्क्रिप्शन’ सुविधा शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि चूंकि सीडीएमए एक ही ट्रांसमिशन चैनल पर कई सिग्नल प्रसारित करने की अनुमति देता है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए वास्तविक समय में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी करना बेहद जटिल हो जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, आतंकवादी संगठन वाईएसएमएस सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं, जो ‘एन्क्रिप्टेड’ और ‘ऑफ-ग्रिड’ संचार को सुविधाजनक बनाने के लिए स्मार्टफोन को रेडियो सेट के साथ एकीकृत करने वाली एक उन्नत प्रौद्योगिकी है।
‘ऑफ-ग्रिड’ संचार पारंपरिक दूरसंचार टावर और इंटरनेट बुनियादी ढांचे को दरकिनार कर संचार की सुविधा प्रदान करता है। वहीं, ‘एन्क्रिप्टेड’ संचार डेटा को अपठनीय कोड में परिवर्तित करके सुरक्षित रखता है, जिसे केवल सही ‘क्रिप्टोग्राफिक की’ वाले प्राप्तकर्ता ही डिकोड करके पढ़ सकते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि अवैध दूरसंचार नेटवर्क के जरिये पीओके में मौजूद आकाओं को घुसपैठ करने वाले समूहों और जम्मू में उनके स्थानीय दल के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में बने रहने में मदद मिलती है, खास तौर पर सेना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की ओर से अग्रिम मोर्चों पर की जा रही निगरानी से बच निकलने में सहायता देने के लिए।
भाषा पारुल नरेश
नरेश