जयपुर, 31 मई (भाषा) जयपुर जिले के कई किसानों ने आरोप लगाया है कि रियल एस्टेट डेवलपर्स ने ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ का दुरुपयोग करके धोखाधड़ी से उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि हड़प ली है।
अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जयपुर शाखा ने कई किसानों को तीन जून को बयान दर्ज कराने और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए तलब किया है।
जयसिंहपुरा समेत सांगानेर क्षेत्र के गांवों के किसानों ने दावा किया कि उन्होंने वर्षों पहले अपनी जमीन कानूनी रूप से बेची थी और पूरा भुगतान प्राप्त कर लिया था, लेकिन बाद में पता चला कि स्वामित्व अधिकारों में बिना उनकी जानकारी के हेरफेर किया गया।
एक किसान कैलाश चंद ने एजेंसी को दिए हलफनामे में कहा कि उनके परिवार ने 2005 में लगभग 1.82 हेक्टेयर भूमि पिंकसिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. को बेची थी और पूरा भुगतान बैंकिंग चैनलों के माध्यम से प्राप्त किया था।
कैलाश चंद के बेटे अनिल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि “हमने बिक्री कानूनी रूप से पूरी की थी और किसी अन्य से कोई लेन-देन नहीं किया। बाद में पता चला कि पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग कर हमारी जमीन पर बिना सहमति कब्जा कर लिया गया। हमें 3 जून को दस्तावेज जमा करने के लिए बुलाया गया है।”
एक अन्य किसान, मदन बलाई को भी एजेंसी ने मामले में तलब किया है। गांववालों से बिक्री दस्तावेज और अन्य बैंकिंग लेन-देन प्रस्तुत करने को कहा गया है।
जांच एजेंसी को दिए हलफनामे की प्रति के अनुसार, यह जांच कथित भूमि माफिया नेटवर्क की गतिविधियों से जुड़ी है, जिसमें ज्ञानचंद अग्रवाल नामक व्यक्ति और अन्य लोग शामिल बताए गए हैं।
अधिकारी पिछले दो दशकों में किए गए स्वामित्व रिकॉर्ड, सरेंडर डीड और पावर ऑफ अटॉर्नी की पड़ताल कर रहे हैं।
कंपनी द्वारा राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) में दाखिल शिकायत में कहा गया है कि कुछ भूमि पर श्रीनाथ विहार कॉलोनी का विकास जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) से अनुमति लेकर किया गया, जबकि भूमि स्वामित्व को लेकर विवाद जारी था।
आरोप है कि परियोजना को झूठे दस्तावेज के आधार पर पंजीकृत किया गया और विवादों व मुकदमों को छिपाया गया। शिकायत में पंजीकरण रद्द करने और फॉरेंसिक ऑडिट जैसी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
मामले की जांच जयपुर में विशेष संचालन समूह (एसओजी) कर रहा है। रेरा शिकायत में यह भी कहा गया है कि ज्ञानचंद अग्रवाल के खिलाफ राजस्थान में 300 से अधिक प्राथमिकी में दर्ज हैं।
भाषा बाकोलिया जोहेब
जोहेब