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एडीएम नवीन बाबू की मौत: केरल सरकार मामले की जांच सीबीआई को सौंपने पर कर रही विचार

तिरुवनंतपुरम, 31 मई (भाषा) केरल की संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम) नवीन बाबू की मौत के मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप सकती है। इस संबंध में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिए जाने की संभावना है।

कांग्रेस विधायक पझाकुलम मधु ने सरकार के इस कदम की पुष्टि करते हुए रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने 29 मई को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में नवीन बाबू की पत्नी मंजूषा से मुलाकात के दौरान उन्हें सीबीआई जांच का आश्वासन दिया था।

रानी निर्वाचन क्षेत्र से विधायक मधु ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ‘‘मंत्रिमंडल की अगली बैठक में इस संबंध में निर्णय लिये जाने की संभावना है।’’

एक ओर जहां नवीन बाबू के परिवार ने इस कदम का स्वागत किया है, वहीं दूसरी ओर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इसे राजनीति से प्रेरित बताया है।

मधु के अनुसार, परिवार पुलिस जांच से संतुष्ट नहीं था और इसी कारण उसने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप का अनुरोध किया।

मंजूषा ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए इसे ‘‘बड़ी राहत’’ बताया। मंजूषा ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात की थी और उनसे सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी, लेकिन उन्हें सीबीआई जांच की दिशा में इतनी जल्द प्रगति होने की उम्मीद नहीं थी।

उन्होंने सीबीआई पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जांच से उनके पति की मौत की सच्चाई सामने आएगी।

नवीन बाबू के भाई प्रवीण बाबू ने भी इस निर्णय का स्वागत किया और कहा कि परिवार को निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की उम्मीद है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमने मौत के कारण समेत कई मुद्दों पर संदेह जताया था। हमें उम्मीद है कि सीबीआई जांच इन सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी और सच्चाई सामने लाएगी।’’

इस मामले में कन्नूर की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष पी. पी. दिव्या एकमात्र आरोपी हैं।

नवीन बाबू 14 अक्टूबर 2024 को कन्नूर स्थित अपने सरकारी आवास में मृत पाए गए थे। इससे एक दिन पहले, दिव्या ने कन्नूर जिला कलेक्टरेट में आयोजित उनके विदाई समारोह के दौरान उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे।

पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर बाद में, दिव्या के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया था।

इससे पहले, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय, परिवार की सीबीआई जांच के अनुरोध संबंधी याचिका खारिज कर चुके हैं।

इस वर्ष मार्च में थालास्सेरी अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने मामले में आगे की जांच का आदेश दिया था। अदालत ने बाबू के परिवार की उन याचिकाओं को स्वीकार किया था जिनमें नए सिरे से जांच और दिव्या के आधिकारिक मोबाइल फोन के ‘कॉल डाटा रिकॉर्ड’ (सीडीआर) प्रस्तुत करने की मांग की गई थी।

हालांकि, माकपा ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के प्रस्तावित कदम की कड़ी आलोचना की और इसे राजनीति से प्रेरित बताया।

माकपा की कन्नूर जिला इकाई के सचिव के. के. रागेश ने कहा कि परिवार की सीबीआई जांच की मांग पहले ही उच्चतम न्यायालय द्वारा खारिज की जा चुकी है और सरकार के इस कदम पर सवाल उठाया।

रागेश ने कहा, ‘‘सरकार और मुख्यमंत्री ऐसी मांग को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं जिसे उच्चतम न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया था।’’

रागेश ने यह भी सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री को राज्य के सतर्कता विभाग की तुलना में सीबीआई पर अधिक भरोसा है।

उन्होंने हालांकि कहा कि माकपा हमेशा नवीन बाबू के परिवार के साथ खड़ी रही है और न्याय मिलना चाहिए।

माकपा नेता ने कहा, ‘‘हमें सीबीआई जांच को लेकर कोई आशंका नहीं है। सच्चाई सामने आने दीजिए।’’

इस मामले को लेकर माकपा ने पहले दिव्या को जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटा दिया था। बाद में, उन्हें पार्टी की जिला समिति से हटाकर शाखा समिति में भेज दिया गया तथा पार्टी के भीतर उनके सभी पद भी वापस ले लिए गए थे।

भाषा रवि कांत रवि कांत सुभाष

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