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भागवत की ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा पर खर्च की भरपाई के अनुरोध वाली याचिका खारिज

नागपुर, 20 अप्रैल (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को प्रदान की गई ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा के लिए उनसे खर्च की भरपाई के अनुरोध वाली जनहित याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया और याचिका के उद्देश्य पर सवाल उठाए।

उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष दायर जनहित याचिका में दावा किया गया कि सुरक्षा कवर की लागत कथित तौर पर 40 लाख से 45 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है, जो सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और राज्य के खजाने का नुकसान है क्योंकि आरएसएस एक पंजीकृत संगठन नहीं है।

याचिका को खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति अनिल किलोर की पीठ ने याचिका दायर करने के पीछे याचिकाकर्ता के मकसद और इरादे पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता के वकील ने यह जानकारी दी।

नागपुर निवासी ललन सिंह द्वारा अपने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर याचिका में यह दलील दी गई कि करदाताओं के पैसे का दुरुपयोग ऐसे व्यक्ति को ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा प्रदान करने के लिए किया जा रहा है जिसका संगठन ‘‘पंजीकृत’’ नहीं है।

याचिकाकर्ता ने सरकार द्वारा भागवत को दी गई उच्च स्तरीय सुरक्षा के लिए उनसे शुल्क की भरपाई का अनुरोध किया था।

उन्होंने 2023 में उच्चतम न्यायालय द्वारा उद्योगपति मुकेश अंबानी से संबंधित एक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने भारत सरकार की नीति के अनुसार उन्हें ‘जेड-प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया था और इसका पूरा खर्च उनके परिवार द्वारा वहन किया जाना था।

भाषा आशीष अविनाश

अविनाश