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संत संसद 2026 में आचार्य सीताराम दास जी महाराज ने कुरीतियों से ऊपर उठने का दिया संदेश

जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। 

इस विशेष कार्यक्रम में श्री महंत आचार्य सीताराम दास जी महाराज भी शामिल हुए। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से राष्ट्रवाद के प्रति जो समर्पण होना चाहिए, उसका आधार सबसे पहले हमारी संस्कृति और संस्कार हैं। उन्होंने कहा कि यहां जो संत सम्मेलन हो रहा है, यह चतुर्थ संत संसद कार्यक्रम है और यह अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि संस्कृति और संस्कार, शास्त्र और शस्त्र—इन सभी का समन्वय होना चाहिए। बिना संस्कृति के समाज सुरक्षित नहीं रह सकता और बिना शास्त्र के धर्म भी सुरक्षित नहीं रह सकता। इसलिए इन सभी तत्वों का संतुलन आवश्यक है।

महाराज ने आगे कहा कि समाज में कई प्रकार की कुरीतियां और विसंगतियां फैलाई जा रही हैं। जाति, प्रांत, भाषा, अगड़े-पिछड़े, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम के नाम पर जो दीवारें खड़ी की जा रही हैं, वे समाज के लिए अत्यंत घातक हैं। हमें इन भेदभावों से बाहर निकलना होगा। उन्होंने कहा कि जब तक हम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जीवन और उनके आदर्शों का अनुसरण नहीं करेंगे, तब तक समाज का कल्याण संभव नहीं है। अंत में उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे आपसी भेदभाव को त्यागकर एकता, और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ें, तभी समाज और राष्ट्र का सही अर्थों में विकास संभव हो सकेगा।