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विपक्ष नहीं चाहता विधायिका में महिलाओं की भागीदारी बढ़े: सम्राट चौधरी

(तस्वीरों के साथ)

पटना, 20 अप्रैल (भाषा) बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) एवं अन्य विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि विपक्षी पार्टियां नहीं चाहतीं कि सामान्य और गरीब वर्ग की महिलाएं सांसद और विधायक बनें।

चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी केवल अपनी बहन प्रियंका गांधी वाद्रा और राजद नेता लालू प्रसाद यादव अपनी बेटी को सांसद देखना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दलों के महिला मोर्चा के आह्वान पर निकाली गई ‘जन-आक्रोश महिला पदयात्रा’ में भाग लेने के बाद आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

यह पदयात्रा महिला आरक्षण संशोधन अधिनियम, यानी लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक के लोकसभा में पारित नहीं हो पाने के विरोध में निकाली गई।

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ एक विधेयक नहीं है, यह देश की आधी आबादी से जुड़ा सवाल है।” उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

चौधरी ने आरोप लगाया कि कुछ दल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि विधेयक पारित होने पर प्रतिनिधित्व में बड़ा बदलाव आता और विधानसभा में महिलाओं की संख्या बढ़ती। उन्होंने इसे सामाजिक बदलाव से भी जोड़ा।

उन्होंने दावा किया कि विपक्षी दलों ने “दशकों से महिलाओं के आरक्षण में बाधा डाली है” जबकि केंद्र और बिहार में राजग सरकारें महिलाओं के उत्थान के लिए काम करती रही हैं।

चौधरी ने कहा, “नीतीश कुमार और नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं की सुरक्षा एवं प्रगति के लिए काम किया है। अब आपका भाई सम्राट चौधरी उसी काम को आगे बढ़ाएगा। यदि कोई आपकी सुरक्षा और प्रगति के रास्ते में आएगा, तो हम उसे पाताल से भी खोज निकालेंगे।”

इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विधेयक पारित नहीं होने के बाद जश्न मनाना गलत संदेश देता है। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर अभियान तेज किया जाएगा और जिलों में भी रैलियां निकाली जाएंगी।

पटना के कारगिल चौक से शुरू हुआ यह मार्च गांधी मैदान तक पहुंचा। रास्ते भर महिलाओं ने नारे लगाए और माहौल पूरी तरह राजनीतिक रहा।

भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने इस मुद्दे को सीधे महिलाओं के अधिकारों से जोड़ते हुए विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। नेताओं ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी रोकने की कोशिश की गई है और यह नारी सम्मान के खिलाफ है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं। वे बैनर और पोस्टर लेकर पहुंचीं। गांधी मैदान में आयोजित सभा में नेताओं ने अपने विचार रखे।

वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता शक्ति यादव ने जन आक्रोश रैली को “पूरी तरह विफल आयोजन” बताया।

उन्होंने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा, “मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी और प्रशासनिक तंत्र के भारी इस्तेमाल के बावजूद भीड़ कम थी और उसमें मुख्य रूप से जीविका दीदियां शामिल थीं।”

उन्होंने दावा किया कि बिहार ग्रामीण आजीविका परियोजनाओं के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जीविका दीदियों को बैठक के नाम पर बुलाया गया था और उनमें से कई को यह भी जानकारी नहीं थी कि वे किस उद्देश्य से एकत्र हुई हैं।

उन्होंने कहा, “कुछ महिलाएं तेजस्वी यादव के समर्थन में नारे लगा रही थीं, तो कुछ नीतीश कुमार को फिर से बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रही थीं। वहां पूरी अव्यवस्था थी।”

यादव ने यह भी आरोप लगाया कि रैली के कारण महत्वपूर्ण मार्ग अवरुद्ध हो गए, जिससे आम लोगों को परेशानी हुई।

उन्होंने कहा, “जिस दल के शासन में मणिपुर में महिलाओं का अपमान हुआ और महिला खिलाड़ियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, वही दल अब महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन को आगे बढ़ाकर दक्षिण और उत्तर भारत के राज्यों के बीच वैमनस्य पैदा करने की कोशिश कर रहा है।”

यादव ने कहा कि राजग गठबंधन की यह सोची-समझी रणनीति थी कि ऐसा विधेयक लाया जाए जिसका असफल होना तय हो और फिर उस पर हंगामा खड़ा किया जाए।

उन्होंने कहा, “उनका छिपा एजेंडा महिला आरक्षण की आड़ में संविधान में बदलाव करना था। विपक्ष ने सदन में उनके इस प्रयास को विफल कर दिया।”

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए राजद की विधान परिषद सदस्य उर्मिला ठाकुर ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी “महिला विरोधी पार्टी” है, जिसका प्रमाण मणिपुर में महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार, नई दिल्ली में पहलवानों के आंदोलन के दौरान महिला खिलाड़ियों के साथ व्यवहार और हाथरस दुष्कर्म जैसे मामलों में देखा जा सकता है।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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