हिमाचल प्रदेश में प्री-मानसून बारिश और खराब मौसम ने व्यापक तबाही मचाई है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च से 30 जून के बीच मौसम संबंधी घटनाओं में 128 लोगों की मौत हुई है, जबकि राज्य को करीब 29.84 करोड़ रुपये (2,984.27 लाख रुपये) का आर्थिक नुकसान हुआ है। लगातार बारिश के कारण राज्य में 44 सड़कें बंद हैं, जिससे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सबसे अधिक 28 सड़कें मंडी जिले में बंद हैं, जबकि शिमला में 17 सड़कें अवरुद्ध हैं।
बारिश का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। पूरे राज्य में 254 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर रेगुलेटर (DTR) अभी भी बंद हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित है। इनमें मंडी में 198 और सिरमौर में 44 DTR प्रभावित हुए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि राज्य में किसी भी पेयजल योजना पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है।
राजस्व विभाग के आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ के अनुसार, मौसम संबंधी घटनाओं में हुई 128 मौतों में सबसे अधिक 75 लोगों की जान पेड़ों या खड़ी चट्टानों से गिरने के कारण गई, जबकि 30 लोगों की मौत डूबने से हुई। जिलावार आंकड़ों में शिमला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 33 लोगों की मौत हुई। इसके बाद चंबा में 23 मौतें दर्ज की गईं। वहीं, लाहौल-स्पीति में इस अवधि के दौरान मौसम संबंधी किसी भी मौत की सूचना नहीं मिली।
इसी अवधि में राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में 270 लोगों की मौत भी हुई। सड़क हादसों में शिमला में 43 और चंबा में 41 लोगों की जान गई। प्री-मानसून बारिश से आवासीय संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 354 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि 1,592 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
आर्थिक नुकसान के मामले में शिमला जिला सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 732.83 लाख रुपये की क्षति दर्ज की गई। इसके बाद सोलन में 464 लाख रुपये और कुल्लू में 426 लाख रुपये का नुकसान हुआ। प्रशासन ने बताया कि लोक निर्माण विभाग (PWD) और राज्य विद्युत बोर्ड की टीमें बंद सड़कों को खोलने, मलबा हटाने और बिजली आपूर्ति बहाल करने में जुटी हुई हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है, क्योंकि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में भारी बारिश और उससे जुड़ी घटनाओं का खतरा बना हुआ है।