केदार मदमहेश्वर यात्रा के आधार शिविर व सीमान्त ग्राम पंचायत गौण्डार के ग्रामीणों व मदमहेश्वर धाम जाने वाले तीर्थ यात्रियों की जिंदगी एक वर्ष से बिजली की तारों पर अटकी है। शासन - प्रशासन की अनदेखी के कारण ग्रामीण व तीर्थ यात्री एक वर्ष से बिजली के तारों पर निर्भर लकड़ी के अस्थायी पुल से आवाजाही करने के लिए विवश है।
भले ही केन्द्र व प्रदेश सरकार सीमान्त गांवों के चहुमुखी विकास के लाख दावे कर रही है मगर एक वर्ष बाद भी शासन - प्रशासन के हुक्मरानों द्वारा गौण्डार गांव के ग्रामीणों की सुध न लिए जाने से ग्रामीण अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वोट के समय ही सरकार के नुमाइंदो को सीमान्त गांवों की याद आती है तथा वोट बटोरने के बाद पांच सालों के लिए अलविदा हो जाते हैं।