देहरादून की सड़कों पर साल दर साल लगातार ट्रैफिक बढ़ रहा है तो वही ट्रैफिक पुलिस पर भी ट्रैफिक जाम और ट्रैफिक नियंत्रण का बोझ बढ़ रहा है। लेकिन वर्तमान समय में ट्रैफिक पुलिस के पास पर्याप्त पुलिस बल नहीं है जो ट्रैफिक को नियंत्रित कर सके। टैफिक पुलिस इसी कमी में ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
दरअसल यातायात के मानकों के हिसाब से मौजूद वाहनों की संख्या के सापेक्ष यातायात कर्मचारियों की संख्या में 20 प्रतिशत है। वर्तमान में बात करें तो देहरादून शहर में ही रजिस्टर्ड वाहन करीब 12 लाख से अधिक है। जिस वक्त राज्य गठन हुआ इस समय देहरादून के लिए यातायात पुलिस का ढांचा भी तैयार कर दिया गया था उसे वक्त केवल एक इंस्पेक्टर और तीन सब इंस्पेक्टर के साथ 104 कर्मचारियों को राजधानी के यातायात की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन समय के साथ वाहनों की संख्या बड़ी तो अफसरों को जरूरत भी महसूस होने लगी।
साल 2008 में यातायात पुलिस की कमान एक डीएसपी स्तर के अधिकारी को दी गई और काम इससे भी नहीं चला तो साल 2009-10 में देहरादून को पहले अधीक्षक ट्रैफिक मिला। सड़कों पर प्रयोग हुए वाहनों की संख्या साल बढ़ती गई अधिकारी बदले गए, लेकिन फोर्स की संख्या लगभग उतनी रही जितनी 2001 में थी। समय के साथ एक सहयोगी पुलिस फोर्स सीपीयू को भी तैनात किया गया मगर इसकी संख्या बढ़ाने के साथ अब कम रह गई है।