Breaking News

स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO केस में FIR, BNS की 5 धाराओं के तहत मामला दर्ज     |   अफ्रीकी द्वीप देश केप वर्डे में सड़क हादसा, 25 लोगों की मौत     |   मणिपुर के चुराचांदपुर में एनकाउंटर, UKNA के 2 उग्रवादी ढेर     |   राम मंदिर चंदा चोरी मामले में 8 आरोपियों की बढ़ी मुश्किलें, 18 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे     |   PM मोदी कल मंत्रियों के साथ करेंगे रिव्यू मीटिंग, मंत्रालयों के कामकाज का लेंगे जायजा     |  

उत्तराखंड में बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर कार्रवाई, देहरादून और हल्द्वानी में कई संस्थान सील

उत्तराखंड सरकार ने बिना जरूरी मान्यता और तय शैक्षणिक नियमों के चल रहे मदरसों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इसी के तहत देहरादून और हल्द्वानी में कई बिना मान्यता वाले मदरसों को सील किया गया है। उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धाकाते ने बताया कि देहरादून में तीन मदरसों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। आजाद कॉलोनी स्थित मदरसा जामिया-तुस-सलाम अल-इस्लामिया को सील कर दिया गया है। वहीं, आजाद कॉलोनी, माजरा स्थित मदरसा दार-ए-अरकम और मदरसा दारुल उलूम रहीमिया के प्रबंधन ने लिखित रूप से बताया है कि उन्होंने संस्थानों का संचालन बंद कर दिया है।

पराग धाकाते ने बताया कि राज्य में अब तक 17 मदरसों को सील किया जा चुका है। इसके अलावा तीन अन्य मदरसों के प्रबंधन ने लिखित रूप से संचालन बंद करने की जानकारी दी है। इस तरह राज्य में कुल 20 बिना मान्यता वाले मदरसों का संचालन बंद कराया जा चुका है। नैनीताल जिले के हल्द्वानी में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई। गौजाजाली उत्तर के शनि बाजार रोड स्थित मदरसा जामिया नूरिया बरकाते अमीना और बनभूलपुरा के इंदिरा नगर में चल रहे एक अन्य बिना मान्यता वाले मदरसे को सील कर दिया गया।

हल्द्वानी के सिटी मजिस्ट्रेट एबी वाजपेयी ने बताया कि संबंधित मदरसा प्रबंधनों से मान्यता से जुड़े जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे। लेकिन वे आवश्यक दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इसके बाद नियमों के अनुसार मदरसों को सील करने की कार्रवाई की गई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने निर्देश दिए हैं कि राज्य में कोई भी शैक्षणिक संस्थान तय नियमों और जरूरी मान्यता के बिना संचालित नहीं होना चाहिए।

राज्य में लागू की गई नई व्यवस्था के तहत सरकार का लक्ष्य अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक और बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही संस्थानों में तय शैक्षणिक नियमों का पालन भी जरूरी किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बच्चों के भविष्य और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।