मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को गोरखपुर में बाढ़, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि और चक्रवात से प्रभावित 9,18,091 किसानों के बैंक खातों में कृषि निवेश अनुदान के रूप में ₹493 करोड़ की सहायता राशि अंतरित की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आपदा की स्थिति में किसानों के साथ खड़ी है। फसल, मकान और पशुधन के नुकसान की भरपाई के लिए 8 से 10 दिनों के भीतर राहत पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
सीएम योगी ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले बिजली नहीं आती थी, लेकिन बिल आता था। अब अन्नदाता किसान को बिजली मिल रही है और उसके बिजली बिल का बोझ भी कम हुआ है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बरसात के दौरान अब तक आपदा प्रभावित किसानों और नागरिकों को करीब ₹1,000 करोड़ की सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर जिन जिलों की रिपोर्ट प्राप्त हुई, वहां प्रभावित किसानों को तुरंत सहायता दी गई। डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी किसान के लिए ₹25,000 की सहायता स्वीकृत होती है, तो उसके खाते में पूरी राशि पहुंचेगी। सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को बिना देरी के आर्थिक मदद मिल सके।
सीएम योगी ने बताया कि इससे पहले भी बाढ़, चक्रवात और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए ₹169 करोड़ जारी किए गए थे। उनके अनुसार, फसल क्षति के लिए 1,29,326 किसानों को करीब ₹78 करोड़ की सहायता दी गई, जबकि जनहानि, पशुहानि और मकान क्षति के मामलों में ₹225.93 करोड़ वितरित किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अतिवृष्टि, बाढ़ और चक्रवात से जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत ₹1.20 लाख की अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। यह राशि फसल क्षति के लिए दिए जा रहे ₹493 करोड़ से अलग है। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें तत्काल आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने अधिकारियों को पशुहानि के मामलों में भी सहायता उपलब्ध कराने को कहा। मुख्यमंत्री के अनुसार, प्राकृतिक आपदा से जनहानि होने पर प्रभावित परिवार को 24 घंटे के भीतर ₹4 लाख की सहायता देने के निर्देश हैं। सीएम योगी ने घोषणा की कि अतिवृष्टि से प्रभावित जिलों में 15 अक्टूबर से धान और मोटे अनाज की खरीद के लिए क्रय केंद्र शुरू किए जाएंगे। इनमें ज्वार, बाजरा और मक्का की खरीद भी शामिल होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान अपनी उपज मंडियों और सरकारी क्रय केंद्रों पर बेच सकेंगे। उन्होंने दावा किया कि खरीद के लिए किसानों पर कोई सीमा या रोक नहीं लगाई जाएगी। यदि बाजार में उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता है, तो सरकार खरीद की व्यवस्था करेगी और भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अर्ली वार्निंग वेदर सिस्टम विकसित किया जा रहा है। कई जिलों में आकाशीय बिजली से पहले अलर्ट देने वाले सिस्टम लगाए गए हैं। इनके जरिए एसएमएस और मोबाइल फोन पर लोगों को चेतावनी दी जाती है, ताकि वे समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच सकें।
उन्होंने बताया कि बारिश की स्थिति का सही आकलन करने के लिए रेन गेज भी लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों को बाढ़ से कटान रोकने, क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करने और आवागमन जल्द बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत और बचाव कार्यों के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी।
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों के ₹36,000 करोड़ के कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 16 लाख निजी ट्यूबवेलों की बिजली मुफ्त की गई है और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया गया है। सरकार के अनुसार, नहरों और अन्य सिंचाई व्यवस्थाओं के जरिए 22 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों के दौरान किसानों को मिलने वाले मुआवजे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले किसानों को दो, चार या 15 रुपये तक का मुआवजा मिलने की शिकायतें सामने आती थीं, जबकि अब सहायता राशि सीधे खातों में भेजी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कृषि बीमा और दुर्घटना सहायता योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने के साथ उनके परिवारों की सुरक्षा भी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को पात्र लाभार्थियों तक सहायता पहुंचाने में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि किसान या बटाईदार तथा उनके परिवार के सदस्य की प्राकृतिक आपदा में मृत्यु होने की स्थिति में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पात्र परिवार को ₹5 लाख की सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।
सीएम योगी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को संकट के समय तत्काल मदद देना, उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करना और खेती के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि अन्नदाता किसान समृद्ध होगा, तभी प्रदेश और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ला, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विभिन्न विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।