Breaking News

पीएम नरेंद्र मोदी कल सूरत और दमन में कई जनकल्याण कार्यक्रमों में होंगे शामिल     |   पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष ने ऋतबृत बनर्जी के निष्कासन को अवैध बताया     |   इंडिया ब्लॉक की 8 जून को होने वाली बैठक में DMK ने शामिल नहीं होने का ऐलान किया     |   कर्नाटक: ‘बेंगलुरु विकास मंत्रालय ही चाहिए’, मंत्री रामलिंगा की CM डीके से डिमांड     |   पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने कालीघाट मंदिर में मां काली के दर्शन किए     |  

भारत चीन 1962 के युद्ध में भी हुई थी मॉकड्रिल, ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों को दी जाती थी ट्रेनिंग

भारत-चीन के 1962 के युद्ध के दौरान भी मॉकड्रिल की गई थी। उस समय ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों को ट्रेनिंग दी जाती थी कि युद्ध के समय में आम जनता  को क्या करना है और क्या नहीं। युद्ध के समय ब्लैकआउट भी होता था, और जिस समय सायरन बजते ही बत्तियां बंद कर दी जाती थीं।

नेटवर्क 10 न्यूज़ एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए 1962 के युद्ध की गवाह विद्यावती ने बताया कि लोग खिड़की और शीशे भी काले कर देते थे ताकि दुश्मन को कुछ दिखाई न दे। उस समय हिंदी और उर्दू अखबार से युद्ध की सूचनाएं मिलती थीं। लोग अखबार पढ़कर युद्ध की स्थिति के बारे में जानते थे।

नेटवर्क 10 न्यूज मेरठ की विद्यावती की तीन पीढ़ियां सेना को समर्पित हैं। विद्यापति बताती हैं कि उनके परिवार ने 1962 और 1971 की लड़ाई में भाग लिया था। वे बताती हैं कि उनके पिता सेना में थे और उन्होंने युद्ध में भाग लिया था।विद्यापति बताती हैं कि 1962 के युद्ध के दौरान उनके परिवार ने बहुत कठिनाइयों का सामना किया था। वे बताती हैं कि उस समय लोगों को युद्ध के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया था और उन्हें बताया गया था कि युद्ध के समय क्या करना है। उनके परिवार की सेना के प्रति समर्पण की भावना आज भी बरकरार है।  उनके परिवार के कई सदस्य सेना में हैं और वे देश की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

आज भी मेरठ में मॉकड्रिल की जा रही है ताकि लोगों को आपात स्थिति के लिए तैयार किया जा सके। विद्यापति कहती हैं कि मॉकड्रिल से लोगों को आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी मिलती है और वे अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों में देशभक्ति का भाव जगाना होगा ताकि पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।