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2027 विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने घोषित की क्षेत्रीय टीमें, जातीय समीकरण और अनुभव-युवा संतुलन पर जोर

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को नए सिरे से मजबूत करना शुरू कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की संस्तुति के बाद पार्टी ने गुरुवार को विभिन्न क्षेत्रों की नई क्षेत्रीय कार्यसमितियों की घोषणा कर दी। करीब दो महीने पहले राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने लखनऊ में संगठन की टीमों के गठन में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।

भाजपा ने 25 जून को छह क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा की थी। इसके बाद 4 जुलाई को लखनऊ में राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष ने जल्द से जल्द क्षेत्रीय टीमें गठित करने को कहा था। अब करीब दो महीने बाद नई क्षेत्रीय कार्यसमितियों का ऐलान किया गया है। यही टीमें आगामी 2027 विधानसभा चुनाव और 2029 लोकसभा चुनाव में संगठन की चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाएंगी।

भाजपा ने नवंबर 2020 के बाद पहली बार क्षेत्रीय स्तर पर नई टीमों का गठन किया है। पिछली टीम की तुलना में इस बार संगठन का आकार भी बढ़ाया गया है। पहले जहां क्षेत्रीय टीमों में सात उपाध्यक्ष और दस मंत्री होते थे, वहीं अब 10 उपाध्यक्ष और 10 मंत्री किए गए हैं। इसी तरह महामंत्रियों की संख्या भी तीन से बढ़ाकर चार कर दी गई है।

नई टीमों में अनुभवी नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी जगह दी गई है। पार्टी ने संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं के साथ ऐसे नेताओं को भी जिम्मेदारी दी है, जिनकी काफी समय बाद संगठन में वापसी हुई है। माना जा रहा है कि भाजपा ने चुनाव से पहले संगठन को व्यापक और संतुलित स्वरूप देने की कोशिश की है।

क्षेत्रीय टीमों के गठन में जातीय समीकरणों का भी खास ध्यान रखा गया है। कानपुर क्षेत्र में राजेश पटेल, काशी में कविता पटेल, ब्रज में राजेश्वर पटेल और अवध में अवधेश कटियार को महामंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। इन नियुक्तियों को कुर्मी समाज को संगठन में प्रतिनिधित्व देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं अलग-अलग क्षेत्रों में अन्य पिछड़ा वर्ग, सवर्ण और विभिन्न सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। पार्टी के अंदर इसे सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

पश्चिम क्षेत्र की टीम में इस बार किसी ब्राह्मण चेहरे को महामंत्री या उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। वहीं अवध क्षेत्र में पूर्व उपाध्यक्ष राजीव मिश्रा को इस बार महामंत्री बनाया गया है। अवध की टीम में ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधित्व को भी बढ़ाया गया है। पश्चिम क्षेत्र में सैनी समाज के दो नेताओं को जगह दी गई है। अशोक मोगा और संजीव सिक्का को महामंत्री बनाया गया है। दोनों नेताओं की लंबे समय बाद संगठन में वापसी हुई है। इसी तरह दूसरे क्षेत्रों में भी कई पुराने और अनुभवी नेताओं को दोबारा संगठन में जिम्मेदारी दी गई है।

काशी क्षेत्र की नई कार्यसमिति की घोषणा क्षेत्रीय अध्यक्ष अशोक चौरसिया ने की। इसमें 9 क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, 4 महामंत्री, 10 मंत्री और 12 सदस्य शामिल हैं। यानी क्षेत्रीय स्तर पर संगठन को पहले की तुलना में अधिक व्यापक बनाया गया है। ब्रज क्षेत्र की टीम में भी क्षेत्रीय अध्यक्ष की संस्तुति के बाद नई कार्यसमिति घोषित की गई है। इसमें उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री और सदस्यों के रूप में अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।

भाजपा की नई क्षेत्रीय टीमों में जिस तरह जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ अनुभवी और युवा नेताओं के बीच संतुलन बनाया गया है, उससे साफ है कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक स्तर पर कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इन टीमों को संतुलित और चुनावी लिहाज से उपयोगी मान रहे हैं। हालांकि, संगठन के भीतर एक धड़ा इसे सामान्य संगठनात्मक बदलाव के तौर पर देख रहा है। अब इन नई टीमों के सामने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और आगामी चुनावों के लिए पार्टी की रणनीति को जमीन पर लागू करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।