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पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंच रही सौर ऊर्जा, 16.25 GW के पार पहुंची रूफटॉप सोलर क्षमता

भारत का स्वच्छ ऊर्जा अभियान अब बड़े सोलर पार्कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के आम घरों की छतों तक पहुंच चुका है। केंद्र सरकार की ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत देश में आवासीय रूफटॉप सोलर क्षमता 16.25 गीगावाट (GW) को पार कर गई है। यह आंकड़ा बताता है कि देश में घरों की छतों पर सौर ऊर्जा अपनाने की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।

75,021 करोड़ रुपये के बजट वाली पीएम सूर्य घर योजना दुनिया की सबसे बड़ी रूफटॉप सोलर योजनाओं में शामिल है। इसके जरिए देशभर के परिवारों को अपनी छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के तहत हर छह दिन में करीब 1 लाख नए परिवार इससे जुड़ रहे हैं। पिछले नौ महीनों में सोलर पैनल लगाने की रफ्तार में भी करीब 3.2 गुना बढ़ोतरी हुई है। अक्टूबर 2025 में जहां रोजाना औसतन 5,038 सोलर पैनल लगाए जा रहे थे, वहीं जुलाई 2026 तक यह संख्या बढ़कर करीब 16,328 पैनल प्रतिदिन हो गई।

रूफटॉप सोलर के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली उपभोक्ताओं और पावर ग्रिड के बीच पारंपरिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब परिवार सिर्फ बिजली खरीदने वाले उपभोक्ता नहीं रह गए हैं, बल्कि अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर रहे हैं। सोलर पैनल से जरूरत से ज्यादा बिजली बनने पर अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजा जा सकता है। इस तरह परिवार अपनी बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ-साथ अतिरिक्त बिजली से आर्थिक लाभ भी हासिल कर सकते हैं। इसी वजह से ऐसे उपभोक्ताओं को ‘प्रोज्यूमर’ कहा जा रहा है, यानी जो बिजली का उपभोग करने के साथ उसका उत्पादन भी करते हैं।

31 जुलाई 2026 तक भारत 300 GW से अधिक स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर चुका है। इसमें 164.59 GW की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता शामिल है। जहां बड़े स्तर की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं देश के ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, वहीं रूफटॉप सोलर इस बदलाव को सीधे आम लोगों के घरों तक पहुंचा रहा है। इससे परिवार न केवल अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रहे हैं, बल्कि देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान का भी हिस्सा बन रहे हैं।

पीएम सूर्य घर योजना को डिजिटल तकनीक से जोड़कर लोगों के लिए सोलर पैनल लगवाने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। इसमें पंजीकरण, आवेदन, स्थापना से जुड़े अनुमोदन और सब्सिडी वितरण जैसी प्रक्रियाएं ऑनलाइन की जाती हैं। योजना को ‘जन समर्थ’ पोर्टल से जोड़ा गया है, जिससे लोगों को बिना ज्यादा कागजी कार्रवाई के सोलर सिस्टम के लिए लोन हासिल करने में मदद मिलती है। वहीं PFMS के साथ एकीकरण से सब्सिडी का भुगतान तेजी से किया जा सकता है।

यह डिजिटल प्लेटफॉर्म देश की 80 से अधिक बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के साथ API के जरिए जुड़ा हुआ है। इससे आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने में मदद मिलती है। डिजिटल टूल्स की मदद से लोगों के लिए यह समझना भी आसान हो गया है कि उनके घर के लिए सोलर सिस्टम लगाना कितना फायदेमंद हो सकता है। उपभोक्ता अपने स्थान, स्वीकृत बिजली लोड और पिछले महीने के बिजली बिल जैसी जानकारी देकर अपने घर के लिए जरूरी सोलर प्लांट की क्षमता का अनुमान लगा सकते हैं।

इसके साथ ही सिस्टम की अनुमानित लागत, सरकारी सब्सिडी, लोन और ब्याज दरों के विकल्प और भविष्य में होने वाली संभावित बचत की जानकारी भी हासिल की जा सकती है। इससे लोगों को सोलर पैनल लगाने से पहले अपनी जरूरत और खर्च का बेहतर अंदाजा मिल जाता है। पीएम सूर्य घर योजना का एक बड़ा आकर्षण परिवारों को मिलने वाला मुफ्त बिजली का लाभ है। योजना के तहत सोलर सिस्टम की क्षमता, उसके उत्पादन और परिवार की बिजली खपत के आधार पर हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल सकता है।

सोलर पैनल से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने की सुविधा परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक लाभ का अवसर भी देती है। इससे घरेलू बिजली खर्च कम करने के साथ-साथ सौर ऊर्जा सिस्टम में निवेश को आर्थिक रूप से आकर्षक बनाने में मदद मिलती है। भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पूरा करने में बड़े स्तर की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के साथ-साथ विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पीएम सूर्य घर योजना का सबसे बड़ा असर यह है कि स्वच्छ ऊर्जा अब केवल बड़ी कंपनियों और बड़े सोलर पार्कों तक सीमित नहीं रही। आम परिवार भी अपनी छत पर सोलर पैनल लगाकर इस ऊर्जा बदलाव में सीधे भागीदार बन रहे हैं। रूफटॉप सोलर का यह मॉडल न केवल परिवारों के बिजली खर्च को कम करने में मदद कर रहा है, बल्कि देश में स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने और नागरिकों को उपभोक्ता से ‘प्रोज्यूमर’ बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आने वाले समय में विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा भारत के साथ-साथ दूसरे विकासशील देशों के लिए भी एक प्रभावी मॉडल बन सकती है।