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‘संत संसद 2026’: हम बच्चों को पैसा कमाने की मशीन बना रहे हैं, इंसान नहीं- स्वामी आनंदमयानंद

जयपुर में आयोजित ‘संत संसद 2026’ में आस्था के साथ देशप्रेम का विशेष संगम देखने को मिला। इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन नेटवर्क 10 न्यूज चैनल द्वारा किया गया। शुरुआत में संतों ने अमर जवान ज्योति पर पहुंचकर शहीदों को नमन किया। वहीं, महिलाओं ने कलश यात्रा के जरिए संतों का जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे और उन्होंने नेटवर्क 10 की इस पहल की सराहना की। 

इस विशेष कार्यक्रम में उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा से डॉ. स्वामी आनंदमयानंद जी भी शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज संत समाज को मिलकर पूरे भारत में ऐसा कार्यक्रम बनाना चाहिए, जिसमें बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी संस्कृति, श्लोक और परंपराओं का ज्ञान भी दिया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि संत और विद्वान मिलकर ऑनलाइन कोर्स बनाएं, ताकि देशभर के बच्चे अपने संस्कारों को समझ सकें।

उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया उन्होंने कई बच्चों को मंत्र सिखाए। शुरुआत में वे बच्चों को सरस्वती मंत्र याद करने के लिए प्रेरित करते थे। धीरे-धीरे बच्चों की याद करने की शक्ति बढ़ने लगी और उन्होंने महसूस किया कि मंत्रों के अभ्यास से पढ़ाई में भी सुधार आया। उन्होंने कहा कि आज हम बच्चों को अच्छा इंसान बनाने के बजाय सिर्फ पैसे कमाने की मशीन बना रहे हैं। पढ़ाई का असली उद्देश्य संस्कार और अच्छे विचार होना चाहिए।

उन्होंने उज्जैन की एक पाठशाला का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां करीब 150 बच्चे अध्ययन करते हैं। उन्होंने कहा कि जब वे वहां पहुंचे, तो देखा कि भवन की स्थिति भी ठीक नहीं थी। बच्चों से बातचीत के दौरान एक बच्चे ने बताया कि उसके घर में खाने तक की कमी थी, इसलिए उसके पिता ने उसे यहां भेजा, ताकि कम से कम उसे दो वक्त का भोजन मिल सके और साथ ही वह वैदिक कर्मकांड व पूजा-पद्धति सीखकर अपना जीवनयापन कर सके।

इसके विपरीत, उन्होंने यह भी कहा कि बड़े शहरों में लोगों के बच्चों को अपनी संस्कृति, जैसे गायत्री मंत्र या श्लोकों का ज्ञान तक नहीं होता। यह स्थिति दर्शाती है कि हम अपनी जड़ों और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपने संस्कारों और मूल्यों से दूर हो जाते हैं, तो भविष्य में पारिवारिक और सामाजिक संबंध भी कमजोर पड़ने लगते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि बच्चों में ज्ञान और संस्कारों का विकास होगा तभी राष्ट्र भी मजबूत बनेगा।

अंत में उन्होंने कहा कि किसी भी देश को आगे बढ़ाने के लिए उसे सबसे पहले शिक्षा के क्षेत्र में सशक्त बनाना आवश्यक है। जब देश शैक्षिक रूप से उन्नत होगा, तो वह आर्थिक रूप से भी मजबूत बनेगा। और जब आर्थिक मजबूती आएगी, तब समाज में जातिवाद नहीं बल्कि सच्चे अर्थों में राष्ट्रभावना और मूल्यों का विकास होगा।