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राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी अभ्यर्थी को सरकारी नौकरी से नहीं किया जाएगा वंचित

उत्तर प्रदेश में किसी अभ्यर्थी को उसकी राजनीतिक विचारधारा या सरकार के प्रति असहमति के आधार पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा। सरकारी नियुक्तियों में चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से जुड़े नए शासनादेश को लेकर उठे सवालों पर नियुक्ति विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि शासनादेश का उद्देश्य राजनीतिक विचारों या शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक गतिविधियों के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी से वंचित करना नहीं है।

नियुक्ति विभाग के अनुसार, शासनादेश में राजनीतिक विचारधारा और हिंसात्मक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर किया गया है। इसमें केवल ऐसे संगठनों से जुड़ाव और गतिविधियों का उल्लेख है, जिनका घोषित उद्देश्य हिंसात्मक तरीके से समाज की मौजूदा व्यवस्था को बदलना है। ऐसे मामलों में निर्धारित नियमों के अनुसार अभ्यर्थी की उपयुक्तता पर विचार किया जाएगा। सरकार की आलोचना करना, वैचारिक असहमति रखना या शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताना हिंसात्मक गतिविधियों की श्रेणी में नहीं आता।

पहले से लागू थे प्रावधान, नए शासनादेश में किया स्पष्ट

नियुक्ति विभाग ने बताया कि सरकारी नियुक्तियों के लिए चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन से संबंधित ये प्रावधान पहले से लागू थे। नए शासनादेश में हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में पुराने प्रावधानों को एक साथ संकलित कर अधिक सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इसका उद्देश्य सत्यापन प्रक्रिया में एकरूपता लाना और नियमों को समझने में होने वाली कठिनाइयों को दूर करना है। विभाग ने कहा है कि शासनादेश की व्याख्या उसके संपूर्ण पाठ और वास्तविक संदर्भ के आधार पर की जानी चाहिए। किसी एक प्रावधान को अलग करके देखने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

तीन साल की अवधि के साथ सकारात्मक बदलाव पर भी विचार

संबंधित नियमों में 21 वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद जांच की तारीख से पहले के तीन वर्षों के दौरान ऐसी गतिविधियों में भागीदारी को व्यक्ति की सक्रिय संलग्नता का प्रमाण मानने का उल्लेख है।

हालांकि, नियमों में यह भी व्यवस्था है कि इस अवधि के दौरान व्यक्ति की प्रवृत्ति में सकारात्मक बदलाव आने के ठोस प्रमाण उपलब्ध होने पर उस पहलू को भी ध्यान में रखा जाएगा। इसलिए केवल तीन वर्ष की अवधि का उल्लेख करके पूरे प्रावधान का अर्थ निकालना सही नहीं है। इसके सभी पहलुओं को एक साथ समझना जरूरी है।

राजनीतिक असहमति और हिंसा को नहीं माना जा सकता समान

नियुक्ति विभाग ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक विचार रखना, सरकार की नीतियों की आलोचना करना और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताना नागरिकों के सामान्य लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े विषय हैं। इन्हें हिंसात्मक तरीके से सामाजिक व्यवस्था बदलने के उद्देश्य वाली गतिविधियों के समान नहीं माना जा सकता।

सरकारी सेवाओं में चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन का उद्देश्य निर्धारित मानकों के आधार पर अभ्यर्थियों की उपयुक्तता की जांच करना है। विभाग ने समाचार माध्यमों से भी शासनादेश को उसके वास्तविक संदर्भ में समझने और भ्रामक व्याख्या से बचने की सलाह दी है, ताकि अभ्यर्थियों के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति न बने।