Uttar Pradesh: लड्डुओं की बारिश... उन्हें पकड़ने के लिए बढ़ते हजारों हाथ ... और मंदिर प्रांगण में गूंजते जयकारे। उत्तर प्रदेश में मथुरा के बरसाना में कुछ ऐसी ही तस्वीरें दिख रही हैं। यहां होली का मतलब सिर्फ रंग नहीं बल्कि उससे पहले मिठाई भी है।
बरसाना के श्री लाडली जू मंदिर में मंगलवार को हजारों श्रद्धालु लड्डू मार होली की अनोखी परंपरा को देखने और उसमें शामिल होने पहुंचे। यह एक ऐसा उत्सव है जहां भक्तों के बीच लड्डू प्रसाद के रूप में, एक अनोखे और आनंद से भरे अंदाज में बांटे जाते हैं।
लड्डू मार होली बरसाना यानी राधा रानी का गांव) की महिलाओं द्वारा नंदगांव यानी भगवान कृष्ण के गांव के पुरुषों को होली खेलने के लिए भेजा गया एक पारंपरिक निमंत्रण है। ये लट्ठ मार होली से एक दिन पहले शुरू होती है। यह रस्म राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है। एक बार जब निमंत्रण स्वीकार कर लिया जाता है, तो मंदिर में लड्डू बरसाए और बांटे जाते हैं। ये होली समारोह की आधिकारिक शुरुआत का संकेत देते हैं।
बरसाना में होली की तैयारी हफ्तों पहले से शुरू हो जाती है, और टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जाता है ताकि सभी के लिए होली का त्योहार
सुरक्षित रहे और सभी इसे पारंपरिक तरीके से मना सकें।
त्योहार के जोश को और बढ़ाते हुए, राजस्थान के कलाकार भक्तिमय लोक गीत गाते हैं, श्रद्धालुओं का मनोरंजन करते हैं और सदियों पुरानी परंपराओं को जिंदा रखते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि बरसाना में होली मनाने का अनुभव एकदम अनूठा है।
लड्डू मार होली के बाद तैयारी अब बुधवार को होने वाली बड़ी लट्ठमार होली की है। इस दिन बरसाना के दामाद माने जाने वाले नंदगांव के लोग होली खेलने के लिए गांव आते हैं और महिलाओं पर रंग डालते हैं। बदले में महिलाएं उन्हें हंसी-मजाक में लट्ठ यानी लाठियों से पीटती हैं, जिससे पुरुष अपनी ढाल से बचते हैं।
सदियों पुरानी यह परंपरा हर साल हजारों श्रद्धालुओं और सैलानियों को बरबस अपनी ओर खींचती है। होली का मुख्य त्योहार पूरे देश में चार मार्च को मनाया जाएगा। हालांकि मथुरा, वृंदावन और बरसाना समेत पूरे ब्रज क्षेत्र में रंगों के त्योहार का जश्न कई दिन पहले ही शुरू हो चुका है।