योगी सरकार उत्तर प्रदेश में समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए डिजिटल तकनीक का सहारा ले रही है। इसी दिशा में प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान करने और उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में अब तक 9,20,169 शिक्षक इस पहल से जुड़ चुके हैं, जबकि 8,15,309 शिक्षकों ने प्रशिक्षण के सभी वीडियो देख लिए हैं।
इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों की अलग-अलग जरूरतों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें बेहतर शैक्षिक सहयोग देने के लिए तैयार करना है। सरकार का जोर ऐसे शिक्षण माहौल को विकसित करने पर है, जहां प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता के अनुसार सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
रामपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में बेहतर सहभागिता
प्रशस्त 2.0 से जुड़ने के मामले में रामपुर, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी के शिक्षक आगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, रामपुर में 90.5 प्रतिशत, पीलीभीत में 88.7 प्रतिशत और लखीमपुर खीरी में 86.3 प्रतिशत शिक्षक इस प्लेटफॉर्म पर जुड़ चुके हैं।
वहीं, प्रशिक्षण के सभी वीडियो देखने वाले शिक्षकों का प्रतिशत रामपुर में 88.3, पीलीभीत में 84.6 और लखीमपुर खीरी में 82.5 दर्ज किया गया है। ये आंकड़े डिजिटल प्रशिक्षण के प्रति शिक्षकों की भागीदारी को दर्शाते हैं।
डिजिटल प्रशिक्षण से बढ़ेगी शिक्षकों की क्षमता
प्रदेश में कुल 16,29,945 शिक्षकों में से 56.5 प्रतिशत शिक्षक प्रशस्त 2.0 पर जुड़ चुके हैं। वहीं, 50 प्रतिशत शिक्षकों ने प्रशिक्षण के सभी वीडियो देख लिए हैं।
एप और वीडियो के माध्यम से शिक्षकों को समावेशी शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनकी शैक्षिक जरूरतों को समझने और पढ़ाई के दौरान आवश्यक सहयोग देने पर जोर दिया जा रहा है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मिलेगा बेहतर शैक्षिक सहयोग
समावेशी शिक्षा का उद्देश्य बच्चों की क्षमताओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उन्हें सीखने के समान अवसर उपलब्ध कराना है। इस प्रक्रिया में शिक्षकों की भूमिका अहम होती है, क्योंकि वे कक्षा में बच्चों के व्यवहार, सीखने के तरीके और उनकी जरूरतों को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
प्रशस्त 2.0 के जरिए शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण देकर इस दिशा में उनकी समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए अधिक सहयोगपूर्ण और संवेदनशील शिक्षण वातावरण तैयार करने में मदद मिल सकती है।
तकनीक और संवेदनशीलता पर योगी सरकार का जोर
योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल के साथ बच्चों की विविध आवश्यकताओं को समझने पर भी ध्यान दे रही है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री शिक्षकों तक पहुंचाई जा रही है, ताकि वे समावेशी शिक्षा के सिद्धांतों को अपनी शिक्षण प्रक्रिया में बेहतर तरीके से शामिल कर सकें।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार समावेशी शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रशस्त 2.0 के माध्यम से शिक्षकों की क्षमता विकसित कर प्रत्येक बच्चे की शैक्षिक जरूरतों के अनुसार सहयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार, शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उनकी शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सहयोग देने के लिए शिक्षकों को सक्षम बनाना है।