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पूर्व पीएम केपी शर्मा की गिरफ्तारी से मचा सियासी विवाद, दलों ने लगाया 'बदले की राजनीति' का आरोप

Nepal: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की गिरफ्तारी ने तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है, इस मामले में कई दलों ने बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नवगठित सरकार पर "राजनीतिक बदले" की भावना से काम करने का आरोप लगाया है।

सीपीएन-यूएमएल के नेता ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को ‘जेन-जेड’ आंदोलन को दबाने में उनकी भूमिका के आरोप में शनिवार सुबह गिरफ्तार किया गया। उस दौरान लगभग दो दर्जन युवाओं समेत 76 लोग मारे गए थे।

नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी लेनिनवादी) के कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की गिरफ्तारी के खिलाफ देश के कई हिस्सों में बीते शनिवार को प्रदर्शन किया। ओली की गिरफ्तारी के विरोध में सीपीएन-यूएमएल के सैकड़ों कार्यकर्ता कोशी प्रदेश के झापा जिले के दमक नगरपालिका, कास्की जिले के पोखरा नगरपालिका और काठमांडू के मैतिघर मंडल और बाबरमहल में इकट्ठा हुए।

सीपीएन-यूएमएल के आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं और ऑल नेपाल नेशनल फ्री स्टूडेंट्स यूनियन (एएनएनएफएसयू) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने नवगठित बालेंद्र शाह सरकार और गृह मंत्री सूडान गुरुंग के खिलाफ नारे लगाए और ओली की तत्काल रिहाई की मांग की। काठमांडू में, सीपीएन-यूएमएल कार्यकर्ताओं ने मैतिघर मंडल, बाबरमहल, नया बनेश्वर, सिंहदुर्बा और भृकुटीमंडप क्षेत्रों में प्रदर्शन किया, जहां बड़ी संख्या में दंगा रोधी पुलिस तैनात थी।

प्रमुख विपक्षी दल, नेपाली कांग्रेस ने भी इन गिरफ्तारियों की आलोचना करते हुए इन्हें "चुनिंदा" बताया और सरकार से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की अपील की। नेताओं ने चेतावनी दी कि जल्दबाजी में लिए गए फैसले देश को अस्थिरता की ओर धकेल सकते हैं।

कमल थापा सहित दूसरी राजनीतिक हस्तियों ने भी चिंता जताते हुए टकराव के खिलाफ चेतावनी दी और कानून के शासन और सुलह की जरूरत पर जोर दिया। ये गिरफ्तारियां पिछले साल के प्रदर्शनों की जांच के निष्कर्षों को लागू करने के कैबिनेट के फैसले के बाद हुई हैं, जबकि आलोचकों का तर्क है कि उचित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किया गया है।