जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में रविवार सुबह सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई है। जिले के चतरू इलाके में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के 2 से 3 आतंकियों को सुरक्षाबलों ने घेर रखा है। दोनों ओर से फायरिंग जारी है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया। सर्च ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई।
इससे पहले 4 फरवरी को भी चतरू में ही सुरक्षाबलों ने जैश के ही एक आतंकी को मार गिराया था। वहीं, उधमपुर जिले में भी गुफा में छिपे जैश के 2 आतंकियों को ग्रेनेड विस्फोट में मार गिराया गया था। व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि CIF डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF का यह जॉइंट आपरेशन था। इसके तहत इलाके की घेराबंदी की गई। इसे ऑपरेशन ‘किया’ नाम दिया गया।
मुठभेड़ 3 फरवरी की शाम 4 बजे शुरू हुई थी। आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर फायरिंग की। करीब एक घंटे तक चली मुठभेड़ के दौरान एक आतंकी को गोली लगी, लेकिन वह अपने साथी के साथ गुफा के अंदर जाकर छिप गया। शाम करीब 7:30 बजे आतंकियों ने अंधेरे का फायदा उठाकर गुफा से बाहर निकलने की कोशिश की। इस दौरान फिर से फायरिंग हुई और तेज धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके बाद अतिरिक्त सुरक्षाबलों को इलाके में भेजा गया और घेराबंदी और कड़ी कर दी गई।
सुरक्षा बलों ने 4 फरवरी को आतंकियों पर UBGLs (अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) का इस्तेमाल किया। जिससे एक हिस्से को विस्फोट के जरिए ध्वस्त कर दिया गया। इस विस्फोट में दोनों आतंकी मारे गए। उधमपुर के साथ-साथ किश्तवाड़ जिले में ऑपरेशन त्राशी-1 भी चल रहा है। यह ऑपरेशन 18 जनवरी को चतरू बेल्ट के मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव के जंगलों में शुरू किया गया था।
ऑपरेशन त्राशी-1 के दौरान पिछले 15 दिनों में आतंकियों के साथ चार बार मुठभेड़ हो चुकी है। 18 जनवरी को हुए पहले एनकाउंटर में 8 जवान घायल हुए थे, जिनमें से हवलदार गजेंद्र सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद 22 और 24 जनवरी को अलग-अलग मुठभेड़ हुईं, जबकि 31 जनवरी को डोलगाम इलाके में फिर से गोलीबारी हुई।