Breaking News

PM आवास प्रोटेस्टः राहुल गांधी और अखिलेश यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया     |   मध्य प्रदेश विधानसभा से पारित हुआ UCC बिल, CM मोहन यादव बोले- ऐतिहासिक पल     |   राहुल-प्रियंका प्रधानमंत्री आवास के करीब धरने पर बैठे, खड़गे समेत कई कांग्रेस सांसद मौजूद     |   सोनम वांगचुक को तुरंत शिफ्ट करें: दिल्ली हाईकोर्ट     |   राहुल गांधी से बात करने के बाद अमित शाह से मिलने पहुंचे जितेंद्र सिंह, गृह सचिव भी साथ     |  

दिल्ली HC का आदेश, सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से तत्काल मेदांता शिफ्ट करने का आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल मेदांता में तत्काल शिफ्ट करने का आदेश दिया। कोर्ट ने साथ ही निर्देश दिया कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा दी गई चिकित्सकीय सलाह और उपचार प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो की ओर से दायर अपील पर यह औपचारिक आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार को वांगचुक को मेदांता अस्पताल ले जाने पर कोई आपत्ति नहीं है।

कोर्ट ने आदेश दिया, "उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए हम निर्देश देते हैं कि सोनम वांगचुक को तत्काल मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया जाए।" हाईकोर्ट ने मेदांता अस्पताल के निदेशक को निर्देश दिया कि वांगचुक के इलाज की निगरानी के लिए डॉक्टरों की एक टीम गठित की जाए और स्वीकृत चिकित्सा मानकों व प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें दवाएं दी जाएं। साथ ही वांगचुक को अस्पताल की मेडिकल टीम की सलाह और उपचार का पालन करने को कहा गया।

यह आदेश कोर्ट द्वारा मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा करने और एम्स, सफदरजंग अस्पताल तथा वांगचुक की इलाज कर रही मेडिकल टीम के डॉक्टरों से बातचीत के बाद आया। सभी डॉक्टरों की राय थी कि वांगचुक को लगातार अस्पताल में निगरानी में रखने की जरूरत है। सुनवाई के दौरान वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा कि वांगचुक के महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मानक स्थिर हैं और वह भूख हड़ताल जारी रखते हुए ओरल रिहाइड्रेशन ले रहे हैं। उन्होंने वांगचुक द्वारा लिखे गए एक पत्र का भी हवाला दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सफदरजंग अस्पताल के अंदर भी वह पुलिस की निगरानी में हैं और उन्हें मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

कोर्ट ने कहा कि वांगचुक द्वारा पत्र में उठाई गई चिंताओं पर भी विचार किया जाना जरूरी है, लेकिन साथ ही डॉक्टरों की सर्वसम्मत राय को भी ध्यान में रखना होगा कि उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र को वांगचुक को प्रतिष्ठित अस्पताल मेदांता में शिफ्ट किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि वांगचुक लगातार मेडिकल निगरानी में रहें और डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ अस्पताल से बाहर न जाएं। उन्होंने कहा कि वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला डॉक्टरों को करना चाहिए, न कि खुद वांगचुक को।

कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए वांगचुक को तत्काल मेदांता अस्पताल शिफ्ट करने का निर्देश दिया। साथ ही सफदरजंग अस्पताल में तैयार किए गए सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और उपचार संबंधी दस्तावेज मेदांता अस्पताल को सौंपने का आदेश दिया, ताकि इलाज में निरंतरता बनी रहे।

इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उस अपील का निपटारा कर दिया, जो एकल पीठ के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से उनकी पसंद के निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति देने से इनकार किया गया था। बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से परीक्षा में अनियमितताओं और NEET-UG पेपर लीक के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस उन्हें सफदरजंग अस्पताल लेकर गई थी।