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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के वरिष्ठ नेता और मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने असम पुलिस द्वारा दर्ज किए गए एक जालसाजी और मानहानि के मामले में उन्हें अग्रिम जमानत दे दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी से जुड़े विवादित बयानों को लेकर दर्ज किया गया था। 

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले की परिस्थितियां 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता' का संकेत देती हैं, इसलिए पवन खेड़ा की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए।

पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश का यह मामला उनके द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किए गए दावों के बाद दर्ज किया गया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेड़ा ने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी, रिनिकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट हैं और विदेशों में उनकी अघोषित संपत्ति है।

इस मामले में खेड़ा का तर्क था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक और राजनीतिक संदर्भ में दिए गए बयानों से उत्पन्न हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए उनके बयानों का चुनिंदा तरीके से अर्थ निकाला गया और यह एफआईआर शिकायतकर्ता (असम के मुख्यमंत्री की पत्नी) के छिपे हुए मकसद और राजनीतिक प्रतिशोध को पूरा करने के लिए दर्ज की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने से पहले, पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन 24 अप्रैल को हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा कि खेड़ा ने जिन दस्तावेजों के आधार पर यह दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन विदेशी पासपोर्ट और अमेरिका में एक कंपनी है, उन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने वाले लोगों का पता लगाने के लिए खेड़ा से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि अगर खेड़ा ने केवल मुख्यमंत्री के खिलाफ आरोप लगाए होते, तो इसे 'राजनीतिक बयानबाजी' कहा जा सकता था, लेकिन उन्होंने इस विवाद में एक निर्दोष महिला को घसीटा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मानहानि का कोई साधारण मामला नहीं है और खेड़ा को अभी अपने दावों को साबित करना बाकी है।