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बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने जनसंघ के नेताओं को किया नमन, बोले- भारत को विश्व गुरु बनाने का संकल्प लें कार्यकर्ता

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को भारतीय जनसंघ के नेताओं और कार्यकर्ताओं के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जनसंघ ने अपने संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विचार को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम किया। नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपने पूर्वजों के दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेकर भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने के लक्ष्य के लिए काम करें।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नितिन नवीन ने गोवा के भारत में विलय और पश्चिम बंगाल से जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनसंघ के नेताओं ने देश की एकता और अखंडता के विचार को मजबूत करने के लिए संघर्ष किया। उनके अनुसार, 1961 में गोवा के भारत में विलय के दौरान और पश्चिम बंगाल से जुड़े मुद्दों पर जनसंघ के सदस्यों ने अपनी भूमिका निभाई।

आजादी का उद्देश्य सिर्फ स्वतंत्रता हासिल करना नहीं था

नितिन नवीन ने कहा कि भारत की आजादी के लिए लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। उनका उद्देश्य केवल देश को स्वतंत्र कराना नहीं, बल्कि ऐसा लोकतंत्र स्थापित करना भी था, जिसमें हर व्यक्ति की चिंता की जाए और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करना और देश को गर्व तथा आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ाना भी स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का हिस्सा था। आज की पीढ़ी को इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करना चाहिए।

‘जनसंघ से जन-जन की यात्रा’ पहल की सराहना

बीजेपी अध्यक्ष ने दिल्ली बीजेपी की पहल ‘जनसंघ से जन-जन की यात्रा’ की सराहना की। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने जो सपने देखे थे, उन्हें पूरा करने के लिए मौजूदा कार्यकर्ताओं को भी प्रयास करना होगा।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समावेशी विकास के विचार का जिक्र करते हुए कहा कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को विकास की यात्रा से जोड़ना जरूरी है। पार्टी कार्यकर्ताओं को इस दिशा में पूरी प्रतिबद्धता और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

1951 में सीमित संसाधनों के साथ हुई थी जनसंघ की शुरुआत

नितिन नवीन ने भारतीय जनसंघ की शुरुआती चुनौतियों को याद करते हुए कहा कि 21 अक्टूबर 1951 को संगठन की स्थापना के समय उसके पास संसाधनों की भारी कमी थी। उस समय रसीद छपवाने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं था, न कार्यालय और न ही परिवहन के साधन उपलब्ध थे। इसके बावजूद संगठन और उसकी विचारधारा को आम लोगों तक पहुंचाने का संकल्प मजबूत था।

उन्होंने कहा कि आज पार्टी कार्यकर्ताओं के पास काम करने के लिए बेहतर परिस्थितियां और अधिक संसाधन हैं। ऐसे में उनकी जिम्मेदारी है कि वे संगठन को और मजबूत करें। नवीन ने कहा कि पिछली पीढ़ी के नेताओं का संकल्प उनके सामने आने वाली चुनौतियों से भी बड़ा था और आज के कार्यकर्ताओं को भी वैसी ही दृढ़ इच्छाशक्ति विकसित करनी चाहिए। बीजेपी अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि मजबूत संकल्प, संगठन के प्रति समर्पण और देश के विकास के लिए लगातार प्रयास करने से भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाने के सपने को आगे बढ़ाया जा सकता है।