एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA) ने गुरुवार को पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों में उड़ान भरने वाले पायलटों को सतर्क रहने की सलाह दी है। क्षेत्र में जारी संघर्ष के बीच ALPA ने "उच्च स्तर की सतर्कता" बरतने और ऑपरेशनल जोखिम का आकलन सुनिश्चित करने को कहा है।ALPA ने अपने एडवाइजरी में कहा कि मध्य पूर्व के कई इलाकों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण नागरिक उड्डयन के लिए खतरा बढ़ गया है। इसमें एयरस्पेस बंद होने की आशंका, मिसाइल और ड्रोन हमले, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के हस्तक्षेप और नागरिक विमानों की गलत पहचान जैसे जोखिम शामिल हैं।
संघ ने कहा कि भले ही एयरलाइंस नियामकीय मंजूरी के आधार पर उड़ानें संचालित कर रही हों, लेकिन पायलटों को यह समझना चाहिए कि इन क्षेत्रों में जोखिम का स्तर अचानक और बिना चेतावनी के बदल सकता है। ALPA ने पायलटों और क्रू को विमानन बीमा, खासकर ‘वॉर-रिस्क’ क्लॉज, की शर्तों को ध्यान से समझने की सलाह दी है। संगठन ने चेतावनी दी कि कुछ परिस्थितियों में बीमा कंपनियां संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में उड़ानों के लिए कवरेज सीमित या समाप्त कर सकती हैं, जिससे क्रू की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
पायलटों से कहा गया है कि वे उड़ान से पहले सभी ऑपरेशनल ब्रीफिंग, NOTAMs और कंपनी एडवाइजरी का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें और अपनी एयरलाइंस से बीमा कवरेज को लेकर स्पष्ट जानकारी लें। साथ ही, जहां जरूरत हो, सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाने में हिचकिचाएं नहीं। ALPA ने दोहराया कि यात्रियों और फ्लाइट क्रू की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया है, जिससे एयरस्पेस प्रतिबंध और उड़ान संचालन में बाधाएं आई हैं। इस बीच, विदेश मंत्रालय ने बताया कि अब तक लगभग 2.80 लाख लोग पश्चिम एशिया से भारत लौट चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और अतिरिक्त उड़ानों के जरिए लोगों की वापसी जारी है।