केंद्र सरकार ने राजस्थान, बिहार और आंध्र प्रदेश में तीन अदालतों को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत घोषित किया है। इन अदालतों में NIA द्वारा जांच किए गए आतंकवाद, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। यह फैसला NIA एक्ट, 2008 की धारा 11 के तहत संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और राज्य सरकारों से चर्चा के बाद लिया गया है। गृह मंत्रालय ने पिछले सप्ताह इसकी अधिसूचना जारी की।
- राजस्थान: जयपुर की स्पेशल कोर्ट (NIA एक्ट केस) को NIA द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालत बनाया गया है। इसका अधिकार क्षेत्र पूरे राजस्थान में होगा।
- बिहार: पटना के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश-XXVI की अदालत को NIA मामलों के लिए Exclusive Special Court No. II बनाया गया है। यह अदालत पूरे बिहार में NIA द्वारा जांच किए गए मामलों की सुनवाई करेगी।
- आंध्र प्रदेश: विशाखापत्तनम में NIA मामलों की सुनवाई के लिए पहले से मौजूद विशेष अदालत को NIA एक्ट के तहत विशेष अदालत का दर्जा दिया गया है। इसका अधिकार क्षेत्र पूरे आंध्र प्रदेश में होगा।
केंद्र सरकार के इस कदम का उद्देश्य NIA द्वारा जांच किए गए मामलों की तेजी से सुनवाई और जल्द फैसला सुनिश्चित करना है। इन मामलों के लिए अलग अदालतें होने से सुनवाई की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। इन तीन नई अदालतों के जुड़ने के बाद देश में NIA के लिए अधिसूचित विशेष अदालतों की संख्या करीब 60 हो गई है।
आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए 31 दिसंबर 2008 को NIA एक्ट लागू किया गया था, जिसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का गठन हुआ। फिलहाल NIA भारत की प्रमुख केंद्रीय आतंकवाद रोधी जांच एजेंसी के रूप में काम करती है। NIA की वेबसाइट पर उपलब्ध ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एजेंसी ने अब तक 690 मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 169 मामलों में फैसला सुनाया जा चुका है। इनमें 156 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया, यानी NIA की दोषसिद्धि दर करीब 92.31 प्रतिशत रही है। एजेंसी फिलहाल NIA एक्ट के तहत आने वाले गंभीर और निर्धारित अपराधों की जांच कर रही है।