योगी सरकार के नेतृत्व में अयोध्या में होने वाला दसवां दीपोत्सव इस बार देश-विदेश की रामलीला परंपराओं का संगम बनेगा। छह और सात नवंबर को संस्कृति विभाग की ओर से 10 से 15 मंचों पर रामलीला का आयोजन किया जाएगा। इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के साथ विदेशी कलाकार भी रामकथा का मंचन करेंगे। इस आयोजन में केरल, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और बंगाल की टीमें अपनी क्षेत्रीय शैलियों में रामलीला प्रस्तुत करेंगी। वहीं, फिलीपींस की टीम की भागीदारी से कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिलेगा।
मलयालम, असमिया और डोगरी में होगी रामलीला
दीपोत्सव के दौरान रामकथा का मंचन अलग-अलग भाषाओं में किया जाएगा। मलयालम, असमिया और डोगरी भाषाओं में होने वाली प्रस्तुतियों के जरिए दर्शकों को देश की विविध रामलीला परंपराओं को जानने का अवसर मिलेगा।
अलग-अलग राज्यों की टीमें अपनी पारंपरिक शैली में रामायण के प्रसंगों को मंच पर जीवंत करेंगी। इससे यह भी सामने आएगा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों में रामकथा लोगों को साझा विरासत से जोड़ती है।
फिलीपींस की टीम दिखाएगी अंतरराष्ट्रीय रंग
अयोध्या अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी के अनुसार, भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के माध्यम से विदेशी रामलीला टीमों को आमंत्रित किया गया है। फिलीपींस की टीम की भागीदारी तय है, जबकि अन्य देशों की टीमों को जोड़ने के प्रयास जारी हैं। इस पहल का उद्देश्य दुनिया के अलग-अलग देशों में प्रचलित रामलीला परंपराओं को एक मंच पर लाना और रामायण की वैश्विक सांस्कृतिक विरासत को सामने लाना है।
दीपोत्सव में दिखेगी भारत की सांस्कृतिक विविधता
संस्कृति विभाग का यह आयोजन अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को और विस्तार देगा। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और संस्कृति प्रेमियों को अलग-अलग भाषाओं और शैलियों में रामकथा देखने का अवसर मिलेगा। दीपों की रोशनी के बीच देशी-विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियां भारतीय परंपराओं, सांस्कृतिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव की झलक पेश करेंगी।