उत्तर प्रदेश को रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार ने अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में ग्रेटर नोएडा में प्रगति रोबोटिक्स पार्क (PRAGATI Robotics Park) स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। यह पार्क 69.52 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य रोबोटिक्स निर्माण, एआई आधारित तकनीक, अनुसंधान और तकनीकी स्टार्टअप को बढ़ावा देना है। परियोजना के पूरी तरह विकसित होने पर एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने का अनुमान है। साथ ही, प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये का सकल मूल्यवर्धन होने की संभावना है।
दो जोन में विकसित होगा रोबोटिक्स पार्क
प्रगति रोबोटिक्स पार्क को दो जोन में विकसित करने की योजना है। पहले जोन के लिए आठ एकड़ भूमि निर्धारित की गई है। इसका विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर गठित विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) के माध्यम से होगा। इसमें ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 26 प्रतिशत और चयनित औद्योगिक साझीदार की 74 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी।
दूसरे जोन के लिए 61.52 एकड़ भूमि आरक्षित की जाएगी। यहां निजी कंपनियां निवेश करके औद्योगिक इकाइयां और अन्य संबंधित गतिविधियां विकसित करेंगी। इस जोन के विकास पर राज्य सरकार का कोई पूंजीगत दायित्व नहीं होगा।
पहले जोन के लिए 126.2 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण
पहले जोन के विकास के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 21.1 करोड़ रुपये का इक्विटी अंशदान करेगा। इसके अलावा राज्य सरकार की ओर से 30 साल के लिए 126.2 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
औद्योगिक साझीदार का चयन गुणवत्ता-आधारित चयन प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। इसके बाद कंपनी का पंजीकरण, भूमि आवंटन और निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। लक्ष्य है कि कंपनी के पंजीकरण के 36 महीने के भीतर पहले जोन का व्यावसायिक संचालन शुरू हो जाए। जरूरत पड़ने पर यह अवधि अधिकतम 48 महीने तक बढ़ाई जा सकेगी।
एक परिसर में मिलेंगी एआई और रोबोटिक्स की आधुनिक सुविधाएं
पार्क में रोबोटिक्स परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्र, रैपिड प्रोटोटाइपिंग, एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मोशन कैप्चर और डेटा लैब जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इन सुविधाओं से स्टार्टअप और उद्यमियों को नए उत्पाद तैयार करने, तकनीक का परीक्षण करने और जीपीयू आधारित कंप्यूटिंग का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही रोबोटिक्स उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण और सीई/यूएल प्रमाणन की क्षमताओं को भी मजबूत किया जाएगा।
स्वदेशी तकनीक और विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा
रोबोटिक्स और एआई का इस्तेमाल विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवाओं, लॉजिस्टिक्स और कई अन्य क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में इस पार्क के जरिए प्रदेश में स्वदेशी तकनीक विकसित करने और रोबोटिक्स उत्पादों के निर्माण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
परियोजना से घरेलू कंपनियों को नए उत्पाद विकसित करने, तकनीकी अनुसंधान करने और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही युवाओं को रोबोटिक्स, एआई, उत्पाद परीक्षण और आधुनिक विनिर्माण के क्षेत्र में कौशल विकास के अवसर मिलेंगे।
सरकार के अनुमान के मुताबिक, पार्क और उससे जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं। पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सालाना करीब 2,000 करोड़ रुपये के सकल मूल्यवर्धन की संभावना है।