धौलपुर: सारे तीर्थो का भांजा कहे जाने वाले धौलपुर के धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थल मचकुंड को लेकर 2 दिन से सोशल मीडिया पर एक सूचना वायरल हो रही है। जिसमें कहा जा रहा है कि मचकुंड पर सफेद रंग कर उसके मूल स्वरूप को बिगाड़ा जा रहा है।
इसे लेकर बुधवार को धौलपुर जिले में सोशल मीडिया पर बवाल सा मच गया और मामला काफी तूल पकड़ता हुआ देखा गया। स्थिति ये हो गई कि इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों से लेकर पूर्व जनप्रतिनिधियों तक ने और आमजन तक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट, कमेंट व शेयर करना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब एक जनप्रतिनिधि ने अपनी पोस्ट में गैर मर्यादित शब्द लिख दिए, जो बिना हकीकत जाने उनके पद के अनुरूप लिखना उचित प्रतीत नहीं होते।
मामले को बढ़ता देख चैनल Network10 ने सच जानने के लिए पड़ताल की। जिसमें पता लगा कि तीर्थराज मचकुंड का मूल स्वरूप नहीं बिगाड़ा जा रहा। मचकुंड अपने मूल स्वरूप में और मूल रंग में ही रहेगा। सोशल मीडिया पर चल रही स्वरूप बिगाड़ने की बात महज अफवाह मात्र है।
फिलहाल मचकुंड का सौंदरयीकरण का कार्य चल रहा है। जिसके पूरे होने के बाद मचकुंड अपने मूल स्वरूप में ही दिखेगा। Network10 ने इस मामले में सौंदर्यीकरण का कार्य देख रहे पुरातत्व विभाग के एईएन अनिल मित्तल से मोबाइल पर बात की। जिन्होंने बताया कि ये कार्य करीब साढ़े 9 करोड रुपए की लागत से किया जा रहा है। इसके लिए बजट पर्यटन विभाग की ओर से आया है उन्होंने बताया कि तीर्थराज मचकुंड को उसके मूल रंग और मूल स्वरूप में ही रखा जाएगा। लेकिन सौंदरीकरण के कार्य को मजबूती प्रदान करने के लिए ये कार्य तीन लेयर में किया जाता है। AEN अनिल मित्तल ने बताया कि सबसे पहले विशेष प्रकार का प्लास्टर किया जाता है, उसके बाद खमीरा कार्य किया जाता है। ये दूसरी परत होती है। जो देखने में सफेद चूना सा लगता है। इसके बाद में तीसरी परत मनचाहे रंग की, की जाती है। ये कार्य तीन परत में मजबूती के लिए किया जाता है।
तीर्थराज मचकुंड पर फिलहाल जो सफेद रंग दिख रहा है वह दूसरी परत है, जो कि सफेद चूने की नहीं है, बल्कि ये खमीरा है, जो देखने मात्र में सफेद चूना सा लगता है। मचकुंड के कार्य पर अभी तीसरी परत भी की जाएगी, जो मचकुंड के मूल रंग की होगी। इसलिए धौलपुर जिलेवासियों को किसी भी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
AEN मित्तल ने बताया कि दूसरी परत का कार्य पूर्ण होने के बाद तीसरी परत का कार्य एक साथ किया जाएगा। जिसके पीछे मुख्य वजह ये है कि यदि बार- बार कलर बनाकर तैयार करेंगे तो रंग में 19-20 का फर्क आ जाएगा, जिससे मचकुंड अच्छा नहीं लगेगा। क्योंकि ये कलर हाथों से मजदूरों द्वारा मिलाकर बनाया जाता है। इसलिए इसके लिए एक साथ पूरा कलर तैयार किया जाएगा, ताकि पूरा रंग एक जैसा दिखे और तीर्थराज मचकुंड का स्वरूप निखरा हुआ तथा अच्छा लगे।